जानिए कब पड़ता है पाला और उससे फसलों को सुरक्षित कैसे रखें

किसान भाइयो को पाले से फसलों की सुरक्षा एवं सतर्कता हेतु कृषि विज्ञान केंद्र, देवास के कृषि वैज्ञानिको द्वारा महत्वपूर्ण सलाह दी जा रही है जिसके माध्यम से वे पाले का नियंत्रण कर सकते हैं..

पाला का पूर्वानुमान :

जिस दिन आकाश पूर्णतः साफ हो ,वायु में नमी की अधिकता हो, कड़ाके की सर्दी हो,सायंकाल के समय हवा में तापमान ज्यादा – कम हो एवं भूमि का तापमान शून्य डिग्री सेंटीग्रेट अथवा इससे कम हो जाये ऐसी स्थिति में हवा में विधमान नमी जलवाष्प सघनिकृत होकर ठोस अवस्था में परिवर्तित हो जाते हैं, जिससे पत्तियों की कोशिका भित्ती क्षतिग्रस्त हो जाती है जिससे पौधों की जीवन प्रक्रिया के साथ साथ उत्पादन भी प्रभावित होता है I

बचाव के उपाय:

1) पाले की सम्भावना होने पर 4 बजे सुबह खेत में 6 -8 जगहों पर धुंआ करना चाहिए यह धुंआ खेत में पड़े घास फूस अथवा पत्तियों को जलाकर भी किया जा सकता है यह प्रयोग इसप्रकार किया जाना चाहिए कि धुंआ सारे खेत में छा जाये तथा खेत के आसपास का तापमान 5 डिग्री सेल्सियस तक आ जाए इसप्रकार धुंआ करने से फसल को पाले से बचाया जा सकता है I

2) पाले की सम्भावना होने पर खेत की हल्की सिचाई कर  देना चाहिए इससे मिटटी का तापमान बढ़ जाता है तथा नुकसान की मात्रा कम हो जाती है  I

3) रस्सी का उपयोग भी पाले से सुरक्षा प्रदान कर सकता हैं, इसके लिए दो व्यक्ति सुबह सुबह एक लम्बी रस्सी को उसके दोनों सिरों से पकड़कर खेत के एक कोने से लेकर दूसरे कोने तक फसल को हिलाते चलते है इससे फसल पर रात का जमा पानी गिर जाता है तथा फसल की पाले से सुरक्षा हो जाती है I

 

किसान भाई रसायनो द्वारा पाले का नियंत्रण कर सकते हैं :-

  • क्लोरोइथाइल ट्राइमिथाइल अमोनियम क्लोराइड का03 प्रतिशत घोल I
  • एन -डाइमिथाइल एमिनो सक्सिनिक एसिड का 01 प्रतिशत घोल I
  • घुलनशील सल्फर 3 से 0.5 प्रतिशत + बोरान 0.1 प्रतिशत घोल I

रसायनो का उपयोग अत्यंत सावधानीपूर्वक किया जाना चाहिए , उपरोक्त में से कोई भी एक घोल बनाकर छिड़काव करके फसल को पाले से बचाया जा सकता है I

 

 

 

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