लाइव विडियो: आयुक्त के जाने के बाद नगर निगम में हाहाकार, वित्तीय व्यवस्थाएं गड़बड़ाने से पार्षदों ने अधिकारियों को खरी खोटी सुनाई

चार महीने बाद नगर निगम पहुंचे सभापति, बैठक में हुई गरमागरम बहस

देवास। नगर निगम से निगमायुक्त विशाल सिंह के तबादले के बाद वित्तीय व्यवस्थाएं गड़बड़ा गई है। कांग्रेस नेताओं ने आयुक्त का तबादला तो करवा दिया लेकिन अब तक उन्हें अपनी मनमर्जी का नया अफसर तक नहीं मिला है। इधर पैसा न मिलने से कई ठेकेदार तिलमिला रहे हैं और पार्षद सवाल उठा रहे हैं। तत्कालीन आयुक्त विशाल सिंह वित्तीय अधिकार किसी को नहीं दे कर गए और न ही जाते जाते किसी ठेकेदार का पेमेंट कर गए। माना जा रहा है इसी को लेकर अब हाहाकार की स्थिति है।

निगम सभापति ने करीब 4 महीने बाद अपने कार्यालय में बैठक ली तो सत्ताधारी दल के पार्षदों ने प्रभारी आयुक्त कैलाश चौधरी को घेर लिया। बैठक में नेता सत्तापक्ष मनीष सेन, पार्षद राजेश यादव, अर्जुन चौधरी, इरफान अली, धर्मेंद्र पाचुनकर, राजेश वर्मा राज, बाली घोसी शामिल थे। पार्षदों ने कई कामों पर सवाल खड़े कर दिए।

  • पार्षद यादव ने ईई चौधरी से पूछा कि नए भवन का प्रस्ताव 12 करोड़ में चार मंजिला भवन बनाने का पास हुआ था, तो फिर तीन मंजिल क्यों बनाई गई।
  • यादव ने नए भवन के इंटीरियर पर टुकड़ों में तीन से चार करोड़ रुपए खर्च करने को लेकर भी ईई को घेरा।
  • ईई चौधरी ने कहा एक मंजिल का पैसा बचा है कभी भी बनवा सकते हैं।
  • पार्षद अर्जुन चौधरी ने पार्षद निधि के 30 लाख में से वार्डों में काम न करवाने की शिकायत ईई से की।
  • नेता सत्तापक्ष सेन ने ईई से कहा कि सात दिनों के अंदर पार्षदों के प्रस्ताव पर टेंडर निकाले जाए, ऐसा न हो कि आचार संहिता लग जाए और काम शुरु न हो।
  • सभापति ने विद्युत विभाग का रजिस्टर देखकर कहा कि 201718 का ऑडिट नहीं हुआ और राशि खर्च कर दी गई।
  • सभापति ने सामान्य शाखा व जल प्रदाय के रजिस्टर भी बुलवाए।
  • सभापति ने सब इंजीनियर सौरभ त्रिपाठी को विभिन्न निर्माण देख एमओएस पर रिपोर्ट मांगी।

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