समलैंगिक दुष्कर्म पर आरोपी को 10 वर्ष का कारावास, 26 हज़ार का अर्थदंड

न्यायालय की ओर से फरियादी को ₹10000 की राशि बतौर क्षतिपूर्ति प्रदान की जाने के आदेश किए

देवास। विशेष नयायालय एससी/एसटी एक्ट देवास ने आरोपी संतोष सेन पिता गेंदालाल सेन उम्र 44 निवासी  सोनकच्छ को समलैंगिकता के आरोप में धारा 377 का दोषी पाते हुए 10 वर्ष के कारावास की सजा और 26 हज़ार रुपए अर्थदंड दिया है। आरोपी ने प्रथम वर्ष के एक युवक के साथ बार बार प्रकृति की व्यवस्था के विपरीत जबरन समलैंगिक सम्बन्ध बनाए थे।

क्या था मामला

सरकारी वकील अशोक चावला के अनुसार घटना इस प्रकार है कि दिनांक 14/7/2015 को 16:45 पर फरियादी द्वारा थाना सोनकच्छ में सूचना दी गई कि वह बीएससी प्रथम वर्ष में पढ़ाई कर रहा है। दिनांक 29 6:15 को दिन के 11:30 पर केपी कालेज के पास भोपाल चौराहे पर खड़ा था।  उसी समय संतोष सेन उसके पास आया और बोला कि उसने पहले उसके साथ गलत काम किया है उसकी माफी मांगता है।  वह उसकी बहन से भी घर चल कर माफी मांग लेगा और उसे मोटर साइकिल पर बैठा कर उसकी बहन के घर अर्जुन नगर तरफ ले जाने लगा।  आधे रास्ते से मोटर साइकिल को सोनकच्छ के तरफ करके उसे सोनकच्छ के कोटेश्वर मंदिर पर ले गया तथा वहां पर उसके साथ मारपीट किया और बोला कि अपने परिवार को नहीं बताना नहीं तो जान से खत्म कर देगा।  संतोष द्वारा धमकी देने से वह डर गया फिर संतोष उसे मोटरसाइकिल से सागर ढाबा पर ले गया वहां पर खाना खिलाया और रात्रि करीब 12:30 पर ढाबे की छत पर ले जाकर उसके साथ गलत काम किया तथा रात को वही रखा।  संतोष ने देवास के रेलवे स्टेशन पर भी उसके साथ समलैंगिक संबंध बनाया।  फिर दूसरे दिन उज्जैन में रामघाट व नरसिंह घाट पर भी उसके साथ समलैंगिक संबंध बनाया।  उसे उज्जैन 8 दिन तक रखे रहा वह उसके साथ समलैंगिक संबंध बनाता रहा।  फिर दिनांक 12 7 2015 को संतोष उसे सोनकच्छ लेकर आया, तब उससे बचकर वह अपने घर गया तब घटना के बारे में अपने पिता को बताया। मामले में पुलिस थाना नहर दरवाजा देवास ने धारा  377 506 तथा  एससी एसटी एक्ट दर्ज किया था। जिस पर नयायालय ने आज फैसला दिया। मामले में शासन की ओर से पैरवी अशोक चावला सरकारी वकील देवास ने की। प्रकरण में सहयोग कोर्ट मुंशी शंकर पटेल का रहा।

न्यायालय की टिप्पणी

अभियुक्त के विरुद्ध धारा 377 एवं 506 भादवी का आरोप प्रमाणित पाया गया है।  जो कि समाज की व्यवस्था के विपरित  प्रकार का अपराध है।  अभियुक्त द्वारा 8 दिनों तक बार-बार  फरियादी के साथ प्रकृति की व्यवस्था के विपरीत  इंद्रियां भोग किया गया है।  अब मामले के तथ्य एवं परिस्थितियों को देखते हुए अभियुक्त के प्रति किसी प्रकार का उदारता पूर्वक दृष्टिकोण अपनाया जाना उचित नहीं है।

office sale