देवास लाइव, Dewas Live News MadhyaPradesh

देवास: प्राइवेट स्कूलों की ‘दुकानदारी’ पर कलेक्टर का हंटर, अब अपनी मर्जी की दुकान से खरीद सकेंगे किताब और ड्रेस!

451

देवास। नए शिक्षा सत्र के शुरू होने से पहले प्राइवेट स्कूलों, पुस्तक प्रकाशकों और विक्रेताओं के एकाधिकार (Monopoly) को खत्म करने के लिए देवास प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं। देवास कलेक्टर ऋतुराज सिंह ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 (1) (2) के तहत जिले की संपूर्ण राजस्व सीमा के लिए कड़े निर्देश जारी किए हैं। इस आदेश से अभिभावकों को बड़ी आर्थिक राहत मिली है। अब कोई भी स्कूल या संस्था अभिभावकों को किसी विशेष दुकान या तय विक्रेता से किताबें, कॉपियां या यूनिफॉर्म खरीदने के लिए मजबूर नहीं कर सकेगी।

30 अप्रैल तक किताबें खरीदने की छूट, रिजल्ट से पहले जारी करनी होगी लिस्ट

​नए निर्देशों के अनुसार, स्कूलों को परीक्षा परिणाम आने से पहले ही अपनी वेबसाइट और सार्वजनिक सूचना पटल (नोटिस बोर्ड) पर अनिवार्य पुस्तकों की सूची चस्पा करनी होगी। स्कूल संचालक या प्राचार्य अभिभावकों पर रिजल्ट से पहले किताबें खरीदने का दबाव नहीं बना सकेंगे। अभिभावक अपनी सुविधा और बाजार में किताबों की उपलब्धता के आधार पर 30 अप्रैल 2026 तक किताबें खरीद सकते हैं। इस दौरान अप्रैल माह में स्कूल केवल विद्यार्थियों के ओरिएंटेशन, व्यावहारिक ज्ञान और रिवीजन पर फोकस करेंगे।

सिर्फ NCERT और MP बोर्ड की किताबें ही होंगी लागू

​कलेक्टर ऋतुराज सिंह ने स्पष्ट किया है कि सीबीएसई (CBSE) से संबद्ध सभी स्कूलों में सिर्फ एनसीईआरटी (NCERT) द्वारा निर्धारित पाठ्य पुस्तकें ही पढ़ाई जाएंगी। वहीं, मध्य प्रदेश बोर्ड (MPBSE) के स्कूलों में कक्षा 9वीं से 12वीं तक मध्य प्रदेश पाठ्य पुस्तक निगम द्वारा मुद्रित किताबें पढ़ाना अनिवार्य होगा। निजी प्रकाशकों की महंगी किताबों के उपयोग को न्यूनतम रखने के निर्देश दिए गए हैं ताकि पालकों पर वित्तीय भार कम पड़े।

पूरा ‘बुक सेट’ खरीदने की मजबूरी नहीं

​पुस्तकों के सेट के नाम पर होने वाली लूट पर भी ब्रेक लगा दिया गया है। आदेश में साफ कहा गया है कि कोई भी विक्रेता अभिभावकों को पूरा सेट खरीदने के लिए बाध्य नहीं करेगा। यदि किसी छात्र के पास पुरानी किताबें उपलब्ध हैं, तो उसे केवल जरूरत की किताबें ही बेची जाएंगी। साथ ही, कॉपियों और उन पर चढ़ाए जाने वाले कवर पर स्कूल का नाम छपा होना जरूरी नहीं होगा। नोट बुक पर साइज, ग्रेड और मूल्य स्पष्ट रूप से अंकित होना चाहिए। स्कूल परिसर में निजी प्रकाशकों या विक्रेताओं की एंट्री और प्रचार-प्रसार पर भी पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है।

3 साल तक नहीं बदलेगी यूनिफॉर्म

​यूनिफॉर्म को लेकर भी प्रशासन ने स्पष्ट गाइडलाइन जारी की है। कोई भी स्कूल अधिकतम दो से अधिक यूनिफॉर्म निर्धारित नहीं कर सकेगा (स्वेटर और ब्लेजर इसके अतिरिक्त होंगे)। एक बार तय की गई यूनिफॉर्म में कम से कम 3 साल तक कोई बदलाव नहीं किया जा सकेगा। इसके अलावा, वार्षिक उत्सव (Annual Function) या अन्य किसी आयोजन के लिए अभिभावकों पर विशेष वेशभूषा या कॉस्ट्यूम खरीदने का दबाव नहीं डाला जाएगा।

तय हुआ स्कूल बैग का वजन

​बच्चों के कंधों का बोझ कम करने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग के मानकों को सख्ती से लागू किया गया है:

  • कक्षा 1 से 2: अधिकतम 1.5 किलो
  • कक्षा 3 से 5: 2 से 3 किलो
  • कक्षा 6 से 7: अधिकतम 4 किलो
  • कक्षा 8 से 9: अधिकतम 4.5 किलो
  • कक्षा 10: अधिकतम 5 किलो

उल्लंघन करने पर BNS के तहत होगी एफआईआर

​यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। जिला दंडाधिकारी ने चेतावनी दी है कि यदि कोई भी स्कूल संचालक, प्राचार्य, संस्था या विक्रेता इन आदेशों का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 223 के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। नियमों की अनदेखी होने पर केवल प्राचार्य ही नहीं, बल्कि स्कूल के प्रबंधक (मैनेजमेंट) और बोर्ड डायरेक्टर्स के सभी सदस्य भी समान रूप से दोषी माने जाएंगे।

You cannot print contents of this website.
Exit mobile version