
देवास (DewasLive)। नगर निगम देवास की महापौर परिषद (एमआईसी) की बैठक सोमवार 9 मार्च को महापौर श्रीमती गीता दुर्गेश अग्रवाल की अध्यक्षता में निगम बैठक हॉल में संपन्न हुई। इस बैठक में आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट को विचारार्थ रखकर परिषद में भेजने के लिए सर्वसम्मति से स्वीकृति दी गई। हालांकि, एमआईसी के इस पिटारे से देवास की जनता के लिए कुछ सकारात्मक फैसलों के साथ-साथ महंगाई के बड़े झटके भी निकले हैं। जिस हिसाब से शहर में नगर निगम टैक्स वसूल रहा है, उस स्तर की बुनियादी सेवाएं देने में वह पूरी तरह विफल साबित हो रहा है। इसके बावजूद जनता पर टैक्स का और भारी बोझ लाद दिया गया है। वहीं, शहर के बहुप्रतीक्षित बस स्टैंड प्रोजेक्ट के ठेकेदार पर निगम की मेहरबानी एक बार फिर देखने को मिली है।
जनता की जेब पर सीधा असर और बढ़ता टैक्स
नगर निगम ने अपनी आय और व्यय के अंतर को कम करने के नाम पर शहर की जनता पर सीधा वित्तीय भार डाल दिया है। शासन के निर्देशानुसार कलेक्टर गाइडलाइन में वृद्धि के अनुरूप वर्ष 2026-27 के लिए संपत्तिकर की दरों में वृद्धि के प्रस्ताव को एमआईसी ने मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही पेयजल प्रदाय में होने वाले खर्च का हवाला देते हुए जलकर (Water Tax) बढ़ाने के निर्णय पर भी मुहर लगा दी गई है। इतना ही नहीं, भवन अनुज्ञा के स्वीकृत प्रकरणों में मलबा शुल्क भी 30 रुपये प्रति फीट से बढ़ाकर सीधे 50 रुपये प्रति फीट कर दिया गया है। शहरवासी पहले से ही टूटी सड़कों, अनियमित सफाई और जलभराव जैसी बुनियादी समस्याओं से जूझ रहे हैं। जमीनी हकीकत यह है कि सेवा के नाम पर निगम के हाथ खाली हैं, लेकिन टैक्स वसूली और करों में वृद्धि के जरिए जनता पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है।
ठेकेदारों पर मेहरबान निगम, ISBT फेस-1 का समय फिर बढ़ा
एमआईसी की बैठक में शहर के नए बस स्टैंड (ISBT फेस-1) का निर्माण कर रहे समदड़िया ग्रुप को एक बार फिर से अभयदान मिल गया है। कार्य की समयावधि खत्म होने के बावजूद ठेकेदार को मय पेनल्टी के साथ समय सीमा बढ़ाने पर सहमति दे दी गई है। इस बड़े प्रोजेक्ट की मियाद बार-बार बढ़ना इस बात की ओर साफ इशारा करता है कि निगम प्रशासन का ठेकेदारों पर कोई ठोस नियंत्रण नहीं है और बड़े ठेकेदार अपनी मर्जी से काम कर रहे हैं।
दिव्यांगों को राहत और बैठक के अन्य अहम फैसले
इन निराशाजनक फैसलों के बीच कुछ जनहितैषी योजनाओं को भी हरी झंडी मिली है। दिव्यांगजन पुनर्वास स्थानीय निधि योजना के 2026-27 के बजट को स्वीकृति दी गई है, जिसके तहत अब नगर निगम के माध्यम से स्थानीय स्तर पर ही दिव्यांगों और विकलांगों को सुविधा उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके अलावा करदाताओं को थोड़ी राहत देते हुए वर्ष 2026-27 में 30 जून तक एकमुश्त अग्रिम टैक्स जमा करने पर जलकर में 6 प्रतिशत और संपत्तिकर में 5 प्रतिशत की छूट का प्रावधान किया गया है। सीवरेज सुधार के लिए अमृत 2.0 योजना के तहत पांचवीं निविदा में दिनेशचन्द्र आर. अग्रवाल (वडोदरा) की वित्तीय दर को स्वीकृति मिली, वहीं प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी 2.0 बीएलसी घटक) के तहत 103, 104 एवं 110 हितग्राहियों की डीपीआर को भी मंजूरी दी गई। एमआईसी ने बस स्टैंड के अनुरक्षण शुल्क की वसूली निविदा के माध्यम से निजी संस्था से करवाने का भी निर्णय लिया है। शहर विकास के अन्य मुद्दों में वार्ड 27 में तोरण द्वार निर्माण, गजरा गियर्स चौराहे पर राजा टोडरमल जी की प्रतिमा की स्थापना, और वार्ड 29 व 40 में मांगलिक भवन निर्माण को भी स्वीकृति दी गई।
बैठक में इनकी रही उपस्थिति
एमआईसी की इस बैठक में निगम मेयर इन काउंसिल सदस्य गणेश पटेल, धर्मेन्द्रसिह बैस, शीतल गेहलोत, मुस्तुफा अंसार एहमद, जितेन्द्र मकवाना, सपना अजय पंडित, ममता बाबु यादव, अंतिम अजय पडियार सहित निगम उपायुक्त देवबाला पिपलोनिया, आरती खेडेकर, प्र.कार्यपालन यंत्री इंदुप्रभा भारती, जगदीश वर्मा, स्वास्थ्य अधिकारी सौरभ त्रिपाठी व अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक के अंत में महापौर ने सभी एमआईसी सदस्यों के साथ वार्डों में होने वाले विकास कार्यों की चर्चा की और समय-सीमा में कार्य पूर्ण करवाने के सख्त निर्देश दिए।
