देवास। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT), केंद्रीय क्षेत्र पीठ, भोपाल ने देवास के शंकरगढ़ नगर वन और जैव विविधता पार्क के संरक्षण के पक्ष में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। NGT ने राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया है कि इस महत्वपूर्ण वन क्षेत्र को पर्यटन गतिविधियों से मुक्त रखा जाए और इसे वन विभाग को सौंप दिया जाए।
न्यायमूर्ति शेओ कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी की पीठ ने 31 अक्टूबर 2025 को सुनाए गए अपने फैसले में, देवास के 50.292 हेक्टेयर वन क्षेत्र को वाणिज्यिक (commercial) पर्यटन परियोजनाओं से बचा लिया है।
याचिका में जिला प्रशासन द्वारा पर्यटन विभाग को आवंटित लगभग 50.292 हेक्टेयर (खसरा संख्या 404, 449, 450/2) भूमि पर गैर-वन गतिविधियाँ शुरू करने के प्रस्ताव को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया था कि यह विकसित हरा-भरा क्षेत्र देवास जैसे औद्योगिक शहर के लिए ‘हरे फेफड़ों’ (green lungs) का काम करता है, और यह माननीय सर्वोच्च न्यायालय के 12.12.1996 के टी. एन. गोदावर्मन निर्णय के अनुसार “मानित वन” (Deemed Forest) की परिभाषा के अंतर्गत आता है।
मामले की सुनवाई के दौरान, मध्य प्रदेश राज्य सरकार ने NGT को सूचित किया कि उसने पर्यावरणीय चिंताओं को ध्यान में रखते हुए प्रस्तावित परियोजना को समाप्त करने का सचेत निर्णय लिया है। इसी के अनुरूप, कलेक्टर, देवास ने 29 सितंबर 2025 को पर्यटन विभाग को पत्र लिखकर आवंटित भूमि को राजस्व विभाग के पास पुनः समाहित (revert to its original status as revenue land) करने के लिए सहमति मांगी है।
NGT द्वारा गठित एक संयुक्त समिति ने अपनी रिपोर्ट में पहले ही यह पुष्टि कर दी थी कि हस्तांतरित भूमि पर अभी तक कोई विकास गतिविधि नहीं पाई गई है। साथ ही, समिति ने यह भी बताया कि सर्वे संख्या 450/2 और 449 में वन विभाग द्वारा कुल 36,077 विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए गए हैं।
NGT ने अपने अंतिम आदेश में मध्य प्रदेश राज्य को स्पष्ट निर्देश दिया कि वह भूमि के उक्त भाग पर वन की स्थिति (status of forest) को बनाए रखे और शंकरगढ़ नगर वन में गैर-वन गतिविधियों (non-forest activity) की अनुमति न दे। इसके अलावा, वन विभाग को मौजूदा वनस्पति और जैव विविधता (biodiversity) (जिसमें जीव-जंतु भी शामिल हैं) का संरक्षण करने का निर्देश दिया गया है। अधिकरण ने राज्य सरकार को यह भी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि वन विभाग को गैप्स में स्थानीय मूल के बहुउद्देशीय वृक्षों के रोपण और उनके रखरखाव के लिए आवश्यक धनराशि प्रदान की जाए। अंत में, NGT ने स्पष्ट किया कि सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के बिना इस क्षेत्र में कोई भी पेड़ क्षतिग्रस्त या काटा न जाए। इन निर्देशों और टिप्पणियों के साथ, मूल आवेदन (Original Application No.37/2025(CZ)) का निस्तारण कर दिया गया है।
याचिकाकर्ता समरजीत जाधव (Samarjeet Jadhav) ने यह आवेदन शंकरगढ़ पहाड़ियों पर विकसित लगभग 83 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले सिटी फॉरेस्ट और बायोडायवर्सिटी पार्क के संरक्षण और संवर्द्धन के लिए दायर किया था। इस क्षेत्र को जागरूक नागरिकों, ग्रीन आर्मी टीम और अन्य संगठनों के प्रयासों से विकसित किया गया था, जिसे अब “मानित वन” (Deemed Forest) माना जाता है।