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देवास जिले में नेत्रदान पखवाड़े का हुआ शुभारंभ, 8 सितंबर तक मनाया जाएगा पखवाड़ा

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देवास. कलेक्‍टर श्री चन्‍द्रमौली शुक्‍ला के मार्गदर्शन में स्‍वास्‍थ्‍य विभाग द्वारा जिले में नेत्रदान पखवाड़ा चलाया जा रहा है। ज़िले में 36वें राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाडे के दौरान लोगों को जागरूकता के लिए विभिन्न गतिविधियों के साथ-साथ स्वास्थ्य संस्थाओ में ओपीडी में आने वाले लोगों को पेम्पलेट देकर नेत्रदान के महत्व को बताया जा रहा है।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ एम पी शर्मा ने बताया कि राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़ा हर वर्ष कि भांति इस वर्ष भी 25 अगस्त से 8 सितम्बर तक मनाया जायेगा।

राष्ट्रीय अंधत्व नियंत्रण कार्यक्रम के जिला अधिकारी डॉ. आर. के. सक्सेना ने बताया कि इस अभियान का उद्देश्य लोगों में नेत्रदान के महत्व पर जन जागरूकता पैदा करना है और लोगों को मृत्यु के बाद अपनी आँखें दान करने के लिए प्रेरित करना है। पखवाड़े के दौरान जिला स्तर एवं ब्लाक स्तर पर नेत्र सहायकों व स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा विद्यालय के छात्र-छात्राओं को भी निशुल्क नेत्रदान की जानकारी दी जाएगी। उन्होंने कहा की नेत्रदान मृत्यु के 6 घंटे के अंदर हो जाना चाहिए। नेत्रदान की सुविधा घर पर भी नि:शुल्क दी जाती है। यदि किसी व्यक्ति के द्वारा जीवन में नेत्रदान की घोषणा न की गई हो, फिर भी रिश्तेदार मृत व्यक्ति का नेत्रदान कर सकते है। नेत्रदाता को मृत्यु पूर्व एड्स, पीलिया, कर्करोग ( कैंसर) रेबीज सेप्टीसीमिया टिटनेस, हेपेटाइटिस तथा सर्पदंश जैसी बीमारी है तो उसके नेत्र दान के लिए अयोग्य माने जाते हैं। नेत्र ऑपरेशन पश्चात तथा चश्मा पहनने वाले व्यक्ति भी नेत्रदान कर सकते हैं मधुमेह (डायबिटीज) के मरीज भी नेत्रदान कर सकते हैं। नेत्रदान हेतु महात्मा गांधी जिला चिकित्सालय देवास के नेत्र विभाग में संपर्क कर सकते हैं। विकासशील देशों में प्रमुख रुप से दृष्टिहीनता स्वास्थ्य समस्याओं में से एक बडी समस्या है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, कॉर्निया की बीमारियाँ (कॉर्निया का नुकसान, जो कि आँखों की अगली परत होती है) मोतियाबिंद और ग्लूकोमा के बाद, होने वाली दृष्टि हानि के प्रमुख कारणों में से एक हैं। किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसके विभिन्न अंगों को दान किया जा सकता हैं तथा उन रोगियों में प्रत्यारोपित किया जा सकता है जिनको आवश्यकता है। ऐसा ही एक अंग ‘आंख’ है। मृत्यु के बाद नेत्रदान से, क्षतिग्रस्त कॉर्निया की जगह पर नेत्रदाता के स्वस्थ कॉर्निया को प्रत्यारोपित किया जाता है। कार्निया प्रत्यारोपण द्वारा दृष्टिहीन व्यक्ति फिर से देख सकता हैं।

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