देवासधर्म संकृति

माँ तुलजा भवानी के प्रांगण में सुख-समृद्धि के लिये हुआ विशेष हवन, यह परम्परा 700 वर्षो से जारी

 

देवास। माता टेकरी पर प्रतिवर्ष लाखों श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं। यहाँ माँ तुलजा भवानी एवं माँ चामुण्डा देवी एक विशेष आस्था का केन्द्र हैं। शहर की सुख-समृद्धि के लिये 700 वर्षो से अधिक समय से बोरखेड़ा सिसोदिया परिवार द्वारा माँ तुलजा भवानी के प्रांगण में विशेष हवन दुर्गा नवमी पर किया जाता रहा हैं। 

इस वर्ष भी नवमी पर हवन किया गया। यह पूजा बोरखेड़ा के सिसौदिया परिवार द्वारा सम्पन्न हुई। नवरात्रि के दौरान टेकरी पर माँ तुलजा भवानी व चामुण्डा देवी की पुजा-अर्चना उल्लास के साथ की जाती है। दूर-दूर से श्रद्धालु मातारानी के दर्शन के लिए यहाँ आते है। टेकरी पर विशेष पूजा-अर्चना का काम भी वर्षो से जारी है। नवमी पर होने वाली यह विशेष पूजा प्रथम पूजा कहलाती है। इसके लिए सिसौदिया परिवार द्वारा तैयारी की गई। पुजा के दौरान माँ तुलजा भवानी और माँ चामुण्डा देवी को अलग-अलग प्रकार के भोग लगाये गए। यह पुजा रात्री 9 बजे से प्रारंभ हुई। रातभर हवन-पुजन का दौर जारी रहा। 

सिसौदिया परिवार के प्रदीप सिहं सिसौदिया इस विशेष पूजा के बारे मे बताते हुए कहते है कि पूर्वजो ने संवत् 1322 मे युद्ध कर देवास सहित आसपास के 29 गाँवो को जीता था। इस समय देवास एक छोटा गाँव था, जबकि नागदा नगर के रूप मे विकसित था। इसके बाद नागदा को प्रमुख केंद्र के रूप मे मनाया गया। तब से ही सुख-समृद्धि के लिए प्रथम पूजा बोरखेड़ा के सिसौदिया परिवार द्वारा की जा रही है। श्री सिसौदिया के अनुसार बाद मे हमारे पूर्वजों का पवार राजाओ से युद्ध हुआ। जिसमे हमारे पूर्वज हार गये। संवत् 1846 मे हमारे पूर्वज पास के ही गाँव बोरखेड़ा मे चले गये। इसके बाद पवार राजाओं से युद्ध चलता रहा। बाद में पवार राजाओं और ठाकुर बोरखेड़ा के मध्य सन 1818 में लोर्ड ऐचेसॉन ने सन्धि करवाई। संधि मे कर वसूली के अधिकार, रजिस्ट्री के अधिकार एवं टेकरी पर होने वाली प्रथम पूजा के अधिकार हमारे पूर्वजों को मिले। उसके बाद से ही यह परंपरा समय के साथ चली आ रही है।

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