देवास लाइव, Dewas Live News MadhyaPradesh

Dewas News: सत्ता का नशा या सिस्टम की लाचारी? तहसीलदार को लिखना पड़ा विधायक को पत्र- ‘आपके नाम पर मनमाना काम कराने का दबाव बना रहा भाजपा नेता’

22

देवास/बागली: मध्य प्रदेश में “सुशासन” के दावों के बीच सरकारी दफ्तरों की हकीकत क्या है, इसकी एक बानगी देवास जिले की बागली तहसील से सामने आई है। यहाँ हालात इतने खराब हो चुके हैं कि एक जिम्मेदार पद पर बैठे तहसीलदार को अपने ही कर्मचारियों की सुरक्षा और सम्मान के लिए स्थानीय विधायक को पत्र लिखना पड़ गया। मामला सत्ताधारी दल भाजपा के एक मंडल अध्यक्ष की गुंडागर्दी और सरकारी कामकाज में अवैध हस्तक्षेप से जुड़ा है।

क्या है पूरा मामला?

बागली की तहसीलदार पीहू कुरील ने स्थानीय विधायक (बागली विधानसभा क्षेत्र) मुरली भंवरा को एक आधिकारिक पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने भाजपा के जटाशंकर मंडल अध्यक्ष गोविंद यादव के खिलाफ गंभीर शिकायतें की हैं। पत्र के अनुसार, भाजपा नेता गोविंद यादव न केवल तहसीलदार कार्यालय के कर्मचारियों के साथ अभद्रता कर रहे हैं, बल्कि खुलेआम विधायक और पार्टी के नाम का दुरुपयोग कर रौब झाड़ रहे हैं।

तहसीलदार द्वारा लिखा गया पत्र

“कोर्ट में गालियां और महिला कर्मचारियों से बदसलूकी”

​तहसीलदार द्वारा लिखे गए पत्र में बेहद चौंकाने वाले खुलासे किए गए हैं। इसमें बताया गया है कि भाजपा नेता गोविंद यादव ने:

  • ​विभाग के रीडर के साथ अभद्र और अशोभनीय “दादागिरी” पूर्ण व्यवहार किया।
  • इससे पहले पटवारी सुश्री कृष्णा परमार और भृत्य श्रीमती मधु राठौर के साथ भी अभद्रता की गई।
  • तहसील कोर्ट परिसर में मौजूद पक्षकारों और पूरे स्टाफ के सामने गालियां दीं, जिससे न्यायालय की गरिमा धूमिल हुई।

विधायक के नाम पर मनमाना काम कराने का दबाव

पत्र का सबसे गंभीर पहलू यह है कि सत्ताधारी पार्टी के नेता सरकारी अधिकारियों पर ‘विधायक’ का धौंस जमाते हैं। तहसीलदार ने लिखा है, “गोविंद यादव द्वारा आपके (विधायक) नाम व पद का रौब दिखाते हुए एवं खुद को भाजपा संघ व मंडल का अध्यक्ष होना बताते हुए मेरे विभाग के कर्मचारियों से मनमाने तरीके से काम करवाने हेतु दबाव बनाया जाता है।”

​यह लाइन साफ इशारा करती है कि प्रदेश में अधिकारी किस कदर राजनीतिक दबाव में काम करने को मजबूर हैं।

SC/ST एक्ट और मानहानि का मामला

​तहसीलदार ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि भाजपा नेता का यह कृत्य भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 499, 500 (मानहानि), 356, 504, 294, 357 और गंभीर SC/ST एक्ट के तहत आता है। एक सरकारी अधिकारी द्वारा अपनी पीड़ा जाहिर करते हुए इन धाराओं का उल्लेख करना यह बताता है कि पानी अब सिर से ऊपर जा चुका है।

सवाल: क्या यही है सुशासन?

​यह पत्र केवल एक शिकायत नहीं, बल्कि सिस्टम पर तमाचा है। जब एक तहसीलदार स्तर का अधिकारी अपने कार्यालय में सुरक्षित महसूस नहीं कर रहा, तो आम जनता का क्या होगा? यह घटना कई सवाल खड़े करती है:

  1. ​क्या भाजपा के राज में ‘कार्यकर्ताओं’ को कानून हाथ में लेने की छूट मिल गई है?
  2. ​क्या विधायक महोदय अपने मंडल अध्यक्ष के खिलाफ कार्रवाई करेंगे, या सत्ता के नशे में इस मामले को दबा दिया जाएगा?
  3. ​महिला कर्मचारियों के साथ अभद्रता करने वाले नेता पर अब तक पुलिस कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

​फिलहाल, तहसीलदार ने विधायक से निवेदन किया है कि ऐसे व्यक्ति का पार्टी पद पर रहना जनता और पार्टी दोनों के लिए हानिकारक है, और उनके खिलाफ वैधानिक दंडात्मक कार्रवाई की जाए। अब देखना यह होगा कि ‘सरकार’ अपने अधिकारी का साथ देती है या अपने ‘नेता’ का।

You cannot print contents of this website.
Exit mobile version