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कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा गेहूं पर प्रक्षेत्र दिवस का आयोजन

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देवास। दिनांक 10.02.2021 को कृषि विज्ञान केन्द्र देवास एवं भा.कृ.अनु.सं.-क्षेत्रीय गेहूं अनुसंधान केन्द्र, इंदौर के तत्वाधान में ग्राम पोलाय जागीर, विकासखण्ड सोनकच्छ में गेहूं प्रक्षेत्र दिवस का आयोजन किया गया।

इस कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केन्द्र देवास एवं क्षेत्रीय गेहूं अनुसंधान केन्द्र, इंदौर के कुल 14 वैज्ञानिक एवं कुल 125 कृषक उपस्थित थे। कार्यक्रम की शुरूआत सरस्वती पूजन उपरांत कृषि विज्ञान केन्द्र, देवास के प्रधान वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॅा. ए.के.दीक्षित ने ग्राम डकाच्या एवं पोलाय जागीर में गेहूं की नई किस्मों पर लगाये गये प्रदर्शन की महत्ता के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि गेहूं में नई किस्मों के प्रयोग से उत्पादन में वृद्धि के साथ-साथ कीट एवं व्याधि का प्रकोप भी कम होता है। क्षेत्रीय गेहूं अनुसंधान केन्द्र के निदेशक डॅा. सांई प्रसाद ने बताया कि वातावरण की अनुकूूलता एवं सिंचाई की उपलब्धता के आधार पर कृषक शरबती एवं कठिया गेहूं का चयन कर गेहूं की खेती करें। साथ ही उन्होंने केन्द्र द्वारा विकसित की गई किस्मों के बारे में भी विस्तृत जानकारी दी। क्षेत्रीय गेहूं अनुसंधान केन्द्र के प्रधान वैज्ञानिक डॅा. ए.के.सिंह ने बताया कि देवास जिले के विभिन्न गांवों में गेहूं की नई प्रजातियों के जो प्रदर्शन लगाये गये हैं, उनका मुख्य उद्देश्य कृषकों तक किस्मों की जानकारी देना हैं जिससे कृषक उन प्रजातियों को अपनाकर खेती को लाभ का धंधा बना सकते हैं। क्षेत्रीय गेहूं अनुसंधान केन्द्र के प्रधान वैज्ञानिक डॅा. के.सी.शर्मा, डॅा. जे.बी.सिंह, डॅा. प्रकाश, डॅा. वर्मा, डॅा. चैधरी, डॅा. दिव्य, डॅा. राहुल आदि ने तकनीकी संबंधी जानकारी पर प्रकाश डाला।

इसी क्रम में कृषि विज्ञान केन्द्र, देवास के शस्य वैज्ञानिक डॅा. महेन्द्र सिंह ने ग्राम डकाच्या में कम सिंचाई में पकने वाली किस्में जैसे कि एच.आई. 1605, एच.आई. 8802 एवं एच.आई. 8805 तथा ग्राम पोलाय जागीर में सिंचित किस्मों वाले गेहूं जैसे कि एच.आई. 1633, एच.आई. 1634, एच.आई. 8737, एच.आई. 8759 किस्मों के प्रदर्शन लगाये गये हैं। ये उन्नतशील किस्मों का उत्पादन परंपरागत किस्मों की तुलना में अधिक है। तत्पश्चात् केन्द्र के पौध संरक्षण वैज्ञानिक डॅा. मनीष कुमार ने गेहूं में लगने वाले जड़ माहू एवं ब्लाइट बीमारी के प्रबंधन के बारे मं बताया। साथ ही उन्होंने चने में समन्वित कीट एवं व्याधि प्रबंधन की जानकारी दी। साथ ही केन्द्र की मृदा वैज्ञानिक डॅा. सविता कुमारी ने बताया कि आधुनिक कृषि में संतुलित उर्वरक के महत्व को बताते हुए रासायानिक उर्वरकों का प्रयोग कम करें एवं जैव उर्वरक के प्रयोग को बढ़ावा दें। साथ ही उन्होंने वातावरणीय नत्रजन का राइजोबियम के माध्यम से प्रयोग करने पर जोर दिया जिससे लागत में कमी की जा सके। कृषकों को प्रदर्शनों के अवलोकन के माध्यम से नई किस्मों की तकनीकी के बारे में जानकारी प्रदाय की गई। इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए पोलाय जागीर के कृषक श्री लक्ष्मीनारायण, श्री गोपाल यादव एवं डकाच्या के कृषक श्री करण यादव एवं सुभाष यादव का योगदान सराहनीय रहा। कार्यक्रम का मंच संचालन एवं आभार व्यक्त डॅा.सविता कुमारी द्वारा किया गया।

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