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देवास में कोविड सैंपलिंग में फर्जीवाड़ा, बिना सैंपल दिए ही एक ही व्यक्ति के मोबाइल पर चार से पांच बार सैंपलिंग के मैसेज

 

देवास लाइव। जिले में चल रही कोविड-19 सेंपलिंग को लेकर एक बड़े फर्जीवाड़े की संभावना है। एक ही मोबाइल नंबर पर अलग-अलग नामों से सैंपलिंग के मैसेज आ रहे हैं। सूत्रों के अनुसार कर्मचारियों को सैंपलिंग के लिए टारगेट दिए गए हैं। इस समय ओपीडी में इतने मरीज नहीं आ रहे हैं इसलिए एक ही मोबाइल नंबर पर सैंपलिंग दर्ज कर फर्जीवाड़ा किया जा रहा है। एक सैंपल के साथ एक जांच किट भी बर्बाद की जाती है। 

देवास के रहने वाले विशाल पटेल जो कि शिप्रा में एक बैंक में काम करते हैं के मोबाइल पर चार बार सेंपलिंग के मैसेज आ चुके हैं जिस पर अलग-अलग नाम दर्ज हैं। विशाल का मई माह में पुलिस ने रोड पर रोक कर रैंडम टेस्ट किया था जिसके बाद उनका मोबाइल रिकॉर्ड में दर्ज हो गया। अब उसी मोबाइल नंबर का इस्तेमाल कर अलग-अलग लोगों के सेंपलिंग रिकॉर्ड दर्ज किए जा रहे हैं। विशाल को डर है कि कहीं रिपोर्ट पॉजिटिव बता दी गई तो उनके लिए मुश्किल खड़ी हो जाएगी।

कोरोना संक्रमण के दौर में देवास जिले में भी करीब एक हजार से ज्यादा सेंपलिंग रोज की जाती थी, लेकिन अब जब मरीजों की संख्या शून्य है तब भी रोज 12-13 सौ सैंपलिंग दिखाई जा रही है। सूत्रों के अनुसार कोविड-19 सैंपल लेने के लिए टारगेट दिए गए हैं जिन्हें पूरा करना मुश्किल हो रहा है इसलिए वॉलिंटियर इस तरह का फर्जीवाड़ा करने लगे हैं। यही नहीं लाखों रुपए की जांच किट भी बर्बाद की जा रही है। मामले में जांच की जाए तो बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हो सकता है।

भोपाल में भी पकड़ा गया बड़ा फर्जीवाड़ा
उल्लेखनीय है कि भोपाल में कोरोना की जांच में बड़ा फर्जीवाड़ा पकड़ा गया है जिसमें बगैर जांच किए ही रिपोर्ट जारी की जा रही थी। कई लोगों ने बताया कि उनसे सिर्फ नाम और मोबाइल नंबर पूछा गया और रिपोर्ट मिल गई। एक कबाड़ी के यहां मिली सूची और सैंपलिंग किट से सारी गड़बड़ी उजागर हुई।  इंदौर में भी सैंपल लेने में फर्जीवाड़े की सूचना पर सभी एसडीएम को रैंडम जांच करने के मौखिक निर्देश दिए गए हैं।

Sneha
Royal Group

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