
दिल्ली, 21 मार्च 2025 – मध्य प्रदेश के छोटे से शहर देवास से निकले युवा उद्यमी प्रणय चौहान और उनके सह-संस्थापक अथर्व पुराणिक ने दिल्ली के केदारनाथ साहनी ऑडिटोरियम में एक भव्य एजुकेशन मीटअप का आयोजन कर शिक्षा के क्षेत्र में एक नई क्रांति की शुरुआत की है। उनके एड टेक स्टार्टअप ‘पढ़ ले’ के इस मेगा इवेंट में हजारों छात्रों ने हिस्सा लिया और डिजिटल शिक्षा के भविष्य को करीब से देखा। यह आयोजन न केवल छात्रों के लिए प्रेरणादायक रहा, बल्कि इसने यह भी साबित कर दिया कि छोटे शहरों से भी बड़े सपने पूरे किए जा सकते हैं।
शिक्षा को बनाया सुलभ और स्मार्ट
प्रणय चौहान, जो मूल रूप से देवास, मध्य प्रदेश के रहने वाले हैं, और अथर्व पुराणिक ने ‘पढ़ ले’ की स्थापना के जरिए शिक्षा को डिजिटल रूप से सुलभ और प्रभावी बनाने का बीड़ा उठाया है। इस इवेंट में दोनों संस्थापकों ने छात्रों के साथ खुलकर बातचीत की और स्मार्ट लर्निंग तकनीकों के फायदों पर प्रकाश डाला। छात्रों ने नई शिक्षा नीति, करियर मार्गदर्शन और डिजिटल लर्निंग से जुड़े अपने सवालों के जवाब पाए, जिससे उनकी पढ़ाई के प्रति उत्सुकता और आत्मविश्वास में इजाफा हुआ।
‘पढ़ ले’ – छात्रों का नया साथी
‘पढ़ ले’ एक ऐसा एडटेक प्लेटफॉर्म है जो सीबीएसई कक्षा 9 से 12 के छात्रों के लिए इंटरेक्टिव स्टडी मटेरियल और पर्सनलाइज्ड कंटेंट प्रदान करता है। इसकी स्मार्ट लर्निंग तकनीक छात्रों की व्यक्तिगत जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की जाती है, जिससे पढ़ाई न केवल आसान बल्कि रोचक भी बनती है। इस प्लेटफॉर्म की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस इवेंट में शामिल छात्रों और अभिभावकों ने इसकी जमकर तारीफ की।
छात्रों और अभिभावकों में जोश
इवेंट में मौजूद छात्रों ने इसे अपनी पढ़ाई और करियर के लिए बेहद उपयोगी बताया। एक छात्र ने कहा, “पढ़ ले के इस आयोजन ने मुझे अपने लक्ष्यों को लेकर स्पष्टता दी और नई तकनीक से पढ़ाई करने का आत्मविश्वास दिया।” वहीं, अभिभावकों ने भी इस पहल को सराहा और इसे शिक्षा के क्षेत्र में एक सकारात्मक कदम करार दिया।
भविष्य की बड़ी योजना
प्रणय चौहान और अथर्व पुराणिक ने इस मौके पर घोषणा की कि वे आने वाले महीनों में देश के अलग-अलग हिस्सों में ऐसे और बड़े आयोजन करेंगे। उनका लक्ष्य है कि गुणवत्तापूर्ण डिजिटल शिक्षा को हर कोने तक पहुंचाया जाए, ताकि ज्यादा से ज्यादा छात्र इसका लाभ उठा सकें। प्रणय ने कहा, “हमारा सपना है कि हर छात्र तक बेहतर शिक्षा पहुंचे, चाहे वह किसी भी शहर या गांव से हो।”
देवास का नाम रोशन
देवास जैसे छोटे शहर से निकलकर प्रणय चौहान ने शिक्षा के क्षेत्र में जो नवाचार किया है, वह न केवल मध्य प्रदेश बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनकी मेहनत और लगन ने यह दिखाया है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं। ‘पढ़ ले’ के जरिए वे न सिर्फ छात्रों के भविष्य को संवार रहे हैं, बल्कि भारत को शिक्षा के क्षेत्र में एक नई दिशा भी दे रहे हैं।
इस आयोजन ने एक बार फिर साबित कर दिया कि शिक्षा में तकनीक का सही इस्तेमाल आने वाली पीढ़ियों के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है। प्रणय चौहान और अथर्व पुराणिक की यह पहल निश्चित रूप से देश भर के छात्रों के लिए एक नई उम्मीद की किरण बनकर उभरी है।


