
देवास के वार्ड 17, अनवटपुरा में भोपाल बायपास की सड़क किनारे पड़ी सरकारी जमीन को देखकर किसी को अंदाजा नहीं था कि यह बेनाम सी पड़ी 8 बीघा नजूल भूमि एक दिन शहर की सबसे बड़ी खबर बन जाएगी। लेकिन जो खेल यहाँ खेला गया, वह न तो छोटा था और न ही अनजाना।
नगर पालिक निगम के फंड से 12 लाख रुपये का टेंडर निकला। कागजों में लिखा गया — “मांगलिक भवन।” लेकिन जमीन पर जो आकार ले रहा था, वह मांगलिक भवन की परिभाषा में कहीं नहीं आता था। स्थानीय लोगों की जुबान पर एक ही बात थी कि यह जमातखाना बन रहा है, और यह सब हो रहा है पार्षद डरफान अली की अनुशंसा पर। बाउंड्री वॉल खड़ी होती रही, और प्रशासन की आँखें बंद रहीं। यहाँ तक कि जमीन के बीच से बहने वाले प्राकृतिक नाले को भी पाटा जाने लगा — जैसे जमीन ही नहीं, पानी का रास्ता भी हड़प लिया जाए।
हिंदू जागरण मंच के दिनेश राठौर ने जब कलेक्टर को लिखित शिकायत दी, तब कहीं जाकर इस मामले ने आधिकारिक दस्तक दी। और जब देवास लाइव ने इस पूरे मामले की परतें उघाड़ीं, तो प्रशासन की नींद टूटी। कलेक्टर ऋतुराज सिंह ने तत्काल जांच के निर्देश दिए। जांच हुई। और जांच में जो सामने आया, वह किसी से छुपा नहीं था — लापरवाही थी, मिलीभगत थी, और पदीय कर्तव्यों की खुलेआम अनदेखी थी।
आयुक्त नगर पालिक निगम का प्रतिवेदन कलेक्टर की मेज पर आया और उसके बाद जो कार्रवाई हुई, वह संदेश देने के लिए काफी थी। उपयंत्री जितेंद्र सिसोदिया और सहायक यंत्री सौरभ त्रिपाठी — दोनों की दो-दो वार्षिक वेतन वृद्धि असंचयी प्रभाव से रोक दी गई। कलेक्टर ऋतुराज सिंह ने साफ कहा — शासकीय कार्यों में शिथिलता और अनुशासनहीनता किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं होगी।
अभी पार्षद की भूमिका और नाला पाटने का मामला जांच के दायरे में है। करोड़ों की यह जमीन फिलहाल सुरक्षित है, लेकिन सवाल अभी भी हवा में तैर रहा है — अगर देवास लाइव ने यह खबर न की होती, तो क्या यह खेल यूँ ही चलता रहता?
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