देवासनगर निगम

कचरा प्रबंधन में देवास नगर निगम आगे, फिर उदयपुर क्यों पहुंची पूरी परिषद? सवाल कायम—देवास से कम अंक वाले उदयपुर में घूमने गए थे या अध्ययन

आलोचना के बाद दो फोटो जारी, खर्च और ‘पार्षद पतियों’ पर निगम चुप

देवास। महापौर प्रतिनिधि दुर्गेश अग्रवाल सहित भाजपा-कांग्रेस पार्षदों का उदयपुर भ्रमण सवालों में घिर गया है। यात्रा के फोटो-वीडियो साझा करने से कथित रूप से मना किया गया। आलोचना बढ़ी तो नगर निगम ने दो तस्वीरों के साथ प्रेस नोट जारी कर इसे “कचरा प्रबंधन का अध्ययन भ्रमण” बताया।

निगम का दावा है कि दल ने उदयपुर का 20 टीडीपी बायोगैस प्लांट, 2 टीडीपी वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट, झीलों की सफाई और पर्यटक स्थलों पर भीड़ नियंत्रण की व्यवस्था देखी। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि कचरा प्रबंधन में उदयपुर से बेहतर प्रदर्शन कर रहा देवास आखिर वहां सीखने क्या गया?

स्वच्छ सर्वेक्षण 2024-25 में देवास को 12,500 में से 11,692 अंक और 5-स्टार रेटिंग मिली थी, जबकि उदयपुर को 10,478 अंक और 3-स्टार रेटिंग मिली। देवास में सभी 45 वार्डों में घर-घर कचरा संग्रहण के साथ प्रतिदिन 65 टन गीले और 45 टन सूखे कचरे के प्रसंस्करण की व्यवस्था पहले से बताई जाती है। ऐसे में तकनीकी अध्ययन के नाम पर पूरी परिषद को ले जाने का औचित्य क्या था? क्या इसके लिए अधिकारियों और विशेषज्ञों की छोटी टीम पर्याप्त नहीं थी?

दौरे में करीब आठ महिला पार्षदों के पति भी शामिल होने की चर्चा है। पार्षद पति नगर निगम में किसी निर्वाचित या अधिकृत पद पर नहीं होते। फिर उन्हें किस हैसियत से ले जाया गया और उनका खर्च किसने उठाया? यदि महिला पार्षदों के स्थान पर उनके पति निर्णय प्रक्रिया और आधिकारिक भ्रमण में शामिल हुए तो यह निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों के अधिकारों पर भी गंभीर सवाल है।

निगम के प्रेस नोट में यात्रा का कुल खर्च, स्वीकृति आदेश, होटल-वाहन व्यवस्था, प्रतिभागियों की अधिकृत सूची और पार्षद पतियों की भूमिका का कोई उल्लेख नहीं है। दौरे की विस्तृत रिपोर्ट या प्राप्त तकनीकी प्रस्ताव भी सार्वजनिक नहीं किया गया।

प्रेस नोट में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जारी बताया गया है, जबकि ये नियम केंद्र सरकार के पर्यावरण मंत्रालय ने अधिसूचित किए हैं। जल्दबाजी में जारी इस प्रेस नोट ने जवाब देने के बजाय नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

जब तक निगम यात्रा का पूरा खर्च, अधिकृत सूची और अध्ययन रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं करता, तब तक “कचरा प्रबंधन भ्रमण” की सफाई सरकारी खर्च पर सैर की आशंका को खत्म नहीं कर सकती। जनता के पैसे का हिसाब जनता के सामने आना ही चाहिए।

सौरभ सचान

सौरभ सचान देवास लाइव (dewaslive.com) के संपादक एवं प्रमुख हैं। देवास लाइव मध्यप्रदेश के देवास जिले से प्रकाशित एक प्रमुख डिजिटल हिंदी न्यूज़ प्लेटफ़ॉर्म है, जो स्थानीय खबरों, सामाजिक मुद्दों और जनहित से जुड़ी घटनाओं को निष्पक्ष और सटीक रूप में प्रस्तुत करता है। सौरभ सचान की पत्रकारिता का उद्देश्य स्थानीय आवाज़ों को सामने लाना और देवास की जमीनी सच्चाई को जनता तक पहुँचाना है।

Related Articles

Back to top button