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लैंड पूलिंग योजना निरस्त की जाए, कई किसान उतरे सड़को पर, सौपा ज्ञापन

 

देवास। लैंड पुलिंग योजना के तहत किसानों की जमीनों पर उद्योग और सड़कें बनाने की योजना के खिलाफ देवास और आसपास के गांव के किसान आज सड़कों पर उतरे। 

चामुंडा कांप्लेक्स से रैली के रूप में कलेक्ट्रेट पहुंचे, किसानों ने जमकर नारेबाजी की और शासन प्रशासन की इस नीति का कड़ा विरोध किया। किसान एकता मंच के बैनर तले हुए इस आंदोलन का नेतृत्व कर रहे प्रदीप चौधरी ने लैंड पुलिंग को एक सोचा समझा स्कैम बताया है। उन्होंने कहा किसान किसी भी कीमत पर अपनी जमीन नहीं देगा। इसके लिए जो भी आंदोलन करना पड़े या अनशन पर बैठना पड़े तो वह करेंगे।

   शहर से लगे आसपास के गांव के सैकड़ों किसान आंदोलन पर उतर आए। उन्होंने मुख्यमंत्री के नाम एसडीएम को दिए ज्ञापन में लैंड पूलिंग योजना वापस लेने की मांग की है। किसान एकता मंच का नेतृत्व कर रहे प्रदीप चौधरी ने कहा कि देवास से सटे करीब 10 गांवों की जमीनों पर लैंड पूलिंग योजना के माध्यम से शासन के द्वारा उद्योगों के लिए लेने की योजना चल रही है। जिसमें बालगढ़ पालनगर , नागदा , बावडिया, अनवटपूरा, रसूलपुर, लोहार पिपलिया, अमोना, बिंजाना, मेंडकी ऐसे 10 गांव सम्मिलित है। सभी गांव के किसान आपसे निवेदन करते हैं या हमारी जमीन उपजाऊ है हम सब गांव के किसान छोटे किसान हैं। इस जमीन के माध्यम से हमारे परिवारों का पालन पोषण होता है। पूर्व में स्थापित हुए उद्योग क्षेत्र और राज्यों की कृषि फॉर्म में हमारी जमीन अधिग्रहण की गई थी, जिसमें ग्राम बालगढ़, पालनगर, रसलपुर, बावडिया , बिंजाना आदि गांव की पूर्व में भी अधिग्रहण की गई। अब हमारे जितने भी किसान हैं हम सब छोटे किसान हैं। अब हमारी कतई शक्ति नहीं है, कि हम हमारी जमीन उद्योगों के लिए दे सकें। पूर्व में जो हमारी जमीन अधिग्रहण की गई थी उनमें जो फैक्ट्रियां स्थापित की गई थी उनमें से करीब 70 % फैक्ट्रियां बंद पड़ी है, जिनके पास अत्यधिक भूमि वेस्टेज पड़ी है । कृपया उस जमीन का उपयोग करें और उन उद्योगों को चालू कराने का प्रयास करें, जिनमें मुख्य रूप से जो फैक्ट बंद पड़ी है जैसे कि टाटा इंटरनेशनल, एस कुमार एस आर एग्रो ऐसे हजारों हजारों एकड़ जमीन शासन की यह उद्योग लेकर बैठे हैं। हम आपसे मांग करते हैं कि आप पहले इन बंद पड़े उद्योगों की जमीनों को उपयोग में लें। जिस क्षेत्र में आप लैंड पूलिंग की योजना बना रहे हैं, वह पूरा क्षेत्र रहवासी और आबादी से जुड़ा है। जितने भी गांव हैं सभी की दूरी आपस 1 से 2 किलोमीटर के दायरे में हैं। जिसके तकरीबन 9 गांव नगर निगम की सीमा में आते हैं पूरा क्षेत्र शहर से सटा हुआ है। अगर यहां पर उद्योग लगाते हैं तो पूरे शहर में प्रदूषण और महामारी फैलने का खतरा रहेगा। किसानों ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि हम बहुत छोटे किसान हैं, हमारे पूर्वजों के खून पसीने से सीची हुई भूमि हमारे परिवारों का लालन – पालन का एकमात्र सहारा है, पूर्व में भी हमारी जमीने हमसे छीन ली गई थी। यह योजना किसी और स्थान पर शहर से दूर बंजर जमीन पर स्थापित करने की योजना करें। हम सब किसान किसी भी कीमत पर अपने 1 इंच जमीन नहीं देंगे। चाहे इसके लिए हमें किसी भी प्रकार का आंदोलन करना पड़े। हम अपेक्षा करते हैं कि आप हमारी आने वाली पीढ़ी के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं करेंगे। इस दौरान बड़ी संख्या में आसपास के किसान उपस्थित थे।

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