
‘ऑपरेशन FAST 2.0’ के तहत कार्रवाई; लोन, ऑनलाइन ट्रेडिंग और इंस्टाग्राम पर सस्ते मोबाइल-लैपटॉप का झांसा देने का आरोप
देवास, 22 सितंबर 2026। देवास पुलिस ने ‘ऑपरेशन FAST 2.0’ के तहत साइबर ठगी के एक संगठित गिरोह का खुलासा करने का दावा किया है। औद्योगिक क्षेत्र थाना पुलिस ने सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, गिरोह के सदस्य देवास जिले के अलग-अलग स्थानों से कॉल सेंटर संचालित कर देश के विभिन्न हिस्सों में लोगों को निशाना बना रहे थे। अब तक सामने आई छह घटनाओं में करीब 10 लाख रुपये की ठगी की जानकारी मिली है।
पुलिस का आरोप है कि लोगों को लोन दिलाने, ऑनलाइन ट्रेडिंग और इंस्टाग्राम पर सस्ते मोबाइल व लैपटॉप बेचने का झांसा दिया जाता था। इसके लिए अपने तथा अन्य लोगों के नाम पर लिए गए सिम कार्ड इस्तेमाल किए जाते थे। प्रेस नोट में किराए के सिम और खातों के उपयोग का भी उल्लेख है। आरोपियों के कब्जे से मोबाइल फोन, सिम कार्ड और अन्य दस्तावेज जब्त किए गए हैं।
भोपाल से मिली छह शिकायतों की जांच में सामने आया मामला
राज्य साइबर पुलिस मुख्यालय भोपाल की ओर से ‘ऑपरेशन FAST’ यानी ‘Forged-Activated-SIM-Termination’ के अंतर्गत प्रदेशभर में साइबर ठगी में इस्तेमाल सिम कार्डों के धारकों, विक्रेताओं और एजेंटों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। अभियान का उद्देश्य अपराध में इस्तेमाल सिम कार्डों और उनसे जुड़े लोगों की पहचान कर वैधानिक कार्रवाई करना है।
इसी अभियान के तहत देवास जिले से संबंधित छह साइबर अपराध शिकायतों की जांच के लिए पुलिस अधीक्षक पुनीत गेहलोद ने निर्देश दिए थे। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शहर गजेन्द्र सिंह वर्धमान के मार्गदर्शन और नगर पुलिस अधीक्षक सुमित अग्रवाल के निर्देशन में औद्योगिक क्षेत्र थाना प्रभारी अमित सोलंकी के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की गई।
टीम ने साइबर सेल भोपाल से प्राप्त शिकायतों और दस्तावेजों के आधार पर संदिग्ध मोबाइल नंबरों की जांच की। पुलिस के अनुसार, नंबरों से जुड़े उपभोक्ताओं की जानकारी के विश्लेषण में सिम कार्ड खरीदने, आगे सप्लाई करने और उनका इस्तेमाल ठगी में करने की कड़ियां सामने आईं।
छह सिम कार्डों से लोन के नाम पर ठगी का आरोप
पुलिस के मुताबिक, अजय परमार से पूछताछ में जानकारी मिली कि उसने अपने नाम पर लिए गए कुल छह सिम कार्डों का इस्तेमाल लोगों को लोन दिलाने के नाम पर साइबर ठगी करने में किया। पुलिस इस मामले से जुड़ी अन्य वारदातों के संबंध में भी पूछताछ कर रही है।
नितिन से विशाल और फिर राजकुमार तक पहुंचे सिम कार्ड
पुलिस के अनुसार, नितिन बामनिया ने अपने नाम के दो सिम कार्ड और अन्य लोगों के सिम कार्ड अपने साथी विशाल को सप्लाई किए थे। विशाल ने ये सिम कार्ड राजकुमार तक पहुंचाए।
राजकुमार से पूछताछ के आधार पर पुलिस का कहना है कि उसने अपने साथियों के माध्यम से ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर लोगों को विश्वास में लेकर साइबर ठगी की।
इंस्टाग्राम पर फर्जी आईडी से सस्ते मोबाइल-लैपटॉप का झांसा
तीसरे तरीके में इंस्टाग्राम पर फर्जी आईडी के जरिए सस्ते इलेक्ट्रॉनिक सामान बेचने का लालच दिए जाने की जानकारी सामने आई है। पुलिस के मुताबिक, अजय बागवान ने अपने नाम के पांच से छह सिम कार्ड और अन्य लोगों के सिम कार्ड अभिषेक कुमावत को दिए थे।
आरोप है कि अभिषेक ने अंकित कुमावत के साथ मिलकर इंस्टाग्राम पर फर्जी आईडी बनाई। इन आईडी के जरिए सस्ते दामों पर मोबाइल और लैपटॉप बेचने की बात कहकर लोगों को झांसे में लिया गया और उनसे साइबर ठगी की गई।
गिरफ्तार सात आरोपियों के नाम और निवास
1. अजय परमार: पिता रामप्रसाद परमार, उम्र 35 वर्ष, निवासी 105, अमृत पार्क, मल्हार रोड, देवास।
2. अजय बागवान: पिता बन्नूलाल बागवान, उम्र 32 वर्ष, निवासी ग्राम खजूरिया, तहसील तराना, जिला उज्जैन।
3. नितिन बामनिया: पिता विष्णु प्रसाद बामनिया, उम्र 19 वर्ष, निवासी ग्राम एनाबाद, तहसील सोनकच्छ, जिला देवास।
4. अभिषेक कुमावत: पिता कमल कुमावत, उम्र 22 वर्ष, निवासी ग्राम खजूरिया, तहसील तराना, जिला उज्जैन।
5. विशाल गौड़: पिता मेहरबान सिंह गौड़, उम्र 21 वर्ष, निवासी ग्राम एनाबाद, तहसील सोनकच्छ, जिला देवास।
6. राजकुमार उर्फ छोटू गौड़: पिता नर्बत सिंह गौड़, उम्र 21 वर्ष, निवासी ग्राम एनाबाद, तहसील सोनकच्छ, जिला देवास।
7. अंकित कुमावत: पिता संतोष कुमावत, उम्र 23 वर्ष, निवासी ग्राम खजूरिया, तहसील तराना, जिला उज्जैन।
दिल्ली में पहले जब्त हो चुके हैं 398 सिम कार्ड
देवास पुलिस के प्रेस नोट के अनुसार, इस गिरोह से पहले भी दिल्ली साइबर क्राइम पुलिस विभिन्न कंपनियों के 398 सिम कार्ड जब्त कर चुकी है। इस संबंध में वर्ष 2025 में दिल्ली के आईजीआई एयरपोर्ट थाने में अपराध दर्ज किया गया था।
398 सिम कार्डों की जब्ती दिल्ली की पूर्व कार्रवाई से संबंधित है। देवास में वर्तमान कार्रवाई के दौरान जब्त मोबाइल फोन और सिम कार्डों की संख्या प्रेस नोट में नहीं बताई गई है।
औद्योगिक क्षेत्र थाने में प्रकरण दर्ज, अन्य भूमिकाओं की जांच
प्रारंभिक जांच के आधार पर औद्योगिक क्षेत्र थाने में अपराध क्रमांक 835/2026 दर्ज किया गया है। पुलिस के प्रेस नोट में भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) और आईटी एक्ट की धारा 66(ग) के तहत प्रकरण दर्ज किए जाने का उल्लेख है।
पुलिस के अनुसार, आरोपियों को रिमांड पर लेकर अन्य वारदातों के बारे में पूछताछ की जा रही है। साइबर ठगी में संलिप्त अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच जारी है। अब तक बताई गई करीब 10 लाख रुपये की रकम छह ज्ञात घटनाओं से संबंधित है।
कार्रवाई में शामिल पुलिस टीम
पुलिस के अनुसार, कार्रवाई में औद्योगिक क्षेत्र थाना प्रभारी अमित सोलंकी, उप निरीक्षक गौरव नगावत, सहायक उप निरीक्षक हितेन्द्र चंद्रवंशी, प्रधान आरक्षक अजय बैस, जितेन्द्र, घनश्याम बामनिया और संजय, आरक्षक रणवीर सिकरवार तथा साइबर सेल से प्रधान आरक्षक सचिन चौहान और शिवप्रताप सिंह सेंगर का योगदान रहा।


