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22 जोड़े विवाह सूत्र में बंधे, 51 कुंडीय गायत्री महायज्ञ संपन्न

देवास । अखिल विश्व गायत्री परिवार शांतिकुंज हरिद्वार के संरक्षण में गायत्री परिवार देवास द्वारा 11से 14 अप्रेल तक 51 कुंडीय गायत्री महायज्ञ प्रशांत होटल के पास आयोजित किया जा रहा है जिसके तीसरे दिन गायत्री महायज्ञ, संगीतमय प्रवचन साथ ही 22 जोड़ें विवाह सूत्र में बंधे ।

गायत्री शक्तिपीठ देवास के मीडिया प्रभारी विक्रमसिंह चौधरी ने बताया कि बिलावली से महज 01 किलोमीटर दूर प्रशांत होटल के पास 51 कुंडीय गायत्री महायज्ञ 11 से 14 अप्रेल तक आयोजित किया जा रहा है जिसके तीसरे दिन प्रात: संगीतमय प्रवचन के साथ 51 कुण्डीय गायत्री महायज्ञ विधिवत प्रारम्भ हुआ । इसके पूर्व शांतिकुंज हरिद्वार से पधारें विद्वान अरुण खण्डागले टोली नायक, बनवारीलाल सैनी सहायक, रमेशचन्द्र तिवारी संगीतज्ञ, रूद्रगिरि गोस्वामी संगीतज्ञ एवं संजयसिंह ठाकुर संगीतज्ञ का मंगल तिलक लगाकर स्वागत किया गया । यज्ञ स्थल पर कार्यक्रम के प्रारंभ में श्रीवेदमाता गायत्री, परम पूज्य गुरुदेव पं. श्रीराम शर्मा आचार्यजी, वन्दनीया माता भगवतीदेवी शर्मा एवं देव आव्हान कर समस्त देवी देवताओं का पूजन कर 51 कुण्डीय गायत्री महायज्ञ प्रारंभ हुआ । यज्ञ के दौरान ही 22 जोड़ो का नि:शुल्क आदर्श विवाह भी वैदिक पद्धति से शांतिकुञ्ज हरिद्वार के विद्वान परिजनों द्वारा सम्पन्न कराया गया तथा गायत्री प्रज्ञापीठ विजयनगर देवास की संरक्षिका दुर्गा दीदी ने उपस्थित होकर नव युगल के मंगलमय जीवन की कामना करते हुए आशीर्वाद प्रदान किया साथ ही आशीर्वचन देते हुए कहा कि पति पत्नी आपस में त्याग और समर्पण की भावना से अपने जीवन रूपी गाड़ी को आगे बढ़ाते रहेंगे तो जीवन हमेशा सुखी रहेगा । विवाह संस्कार के दौरान टोली नायक श्री अरुण खण्डागले ने कहा कि विवाह संस्कार केवल कर्मकांड नहीं है, बल्कि यह एक प्रेरणास्पद प्रकिया है। भारतीय संस्कृति में सम्पूर्ण वैदिक युगीन कर्मकांड विज्ञान सम्मत व तर्क प्रधान है, यह लकीर पीटने वाला ढकोसला मात्र नहीं है । गृहस्थ जीवन के बारे में बताते हुए श्री खण्डागले ने बताया कि पूज्य गुरुदेव ने कहा था कि गृहस्थ एक तपोवन है जिसमें सेवा, संयम, त्याग एवं सहिष्णुता की साधना करनी पड़ती है। संसार को छोड़कर विरक्त हो जाना या सन्यास धारण करना सहज है किंतु गृहस्थ में रहकर त्याग, सहयोग व सहकार का पालन कर शानदार जीवन जीना एक चुनौतीपूर्ण कार्य है। इसलिए गृहस्थ को ही तपोवन कहा गया है। कन्यादान के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि कन्या कोई वस्तु नहीं जिसका दान किया जाय बल्कि यह एक जिम्मेदारी का हस्तान्तरण है। अब तक कन्या माता – पिता के संरक्षण में पली बढ़ी किंतु अब उस उत्तरदायित्व को वर को सौंपा जा रहा है । आयोजन समिति के सूत्रधार जगदीश चौहान, उनके परिवार व अन्य श्रद्धालु द्वारा भी यथोचित भेंट – उपहार प्रदान किए गए एवं सुश्री दुर्गा दीदी ने भी सभी वधुओं को साड़ी के साथ सौभाग्य – शृंगार की सामग्री आशीर्वाद स्वरूप भेंट की।

विवाह संस्कार में चारुप्रभा बाबर के नेतृत्व में कौशल्या मोहरी, पुष्पा सक्सेना, मंजूदेवी पटेल, सुंदरबाई राठौर, सुशीला निहाले, सुमन गुंजाल, राजकली बघेला, गीता जोशी, सुनन्दा बालपांडे, लीलादेवी सोनी आदि बहनों ने उपाचार्य की भूमिका निभाई । सन्ध्या काल के कार्यक्रम दीपयज्ञ में टोली सहायक बनवारीलाल सैनी ने कहा कि जिस प्रकार दीपक बाहरी अंधकार को दूर करता है उसी प्रकार हम भी हमारे अन्तर्मन के अंधकार को ज्ञान रूपी दीपक जलाकर दूर करे जिससे परम पूज्य गुरुदेव का सपना मनुष्य में देवत्व का उदय व धरती पर स्वर्ग का अवतरण होगा पूरा होगा ।
कार्यक्रम में जयेश चौहान, विनय चौहान, ओमप्रकाशसिंह बनाफर, हीरालाल निहाले, मनीष महाजन, महेश आचार्य, सुरेश बालपांडे आदि का सराहनीय सहयोग रहा । कार्यक्रम में रमेशचंद्र मोदी, जगदीश चौहान, कन्हैयालाल मोहरी, विष्णुप्रसाद राठौर, बद्रीप्रसाद मोहरी, श्याम चौहान बद्रीलाल पहलवान, सीताराम बिलावली सहित सैकड़ों परिजन उपस्थित थे ।
14 अप्रेल को प्रात: 08.30 बजे से 51 कुण्डीय गायत्री महायज्ञ की पूर्णाहुति, आरती, शांतिकुंज विद्वानों की बिदाई पश्चात महाप्रसाद (भंडारा) का वितरण होगा ।

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