मध्यप्रदेश विधानसभा में UCC विधेयक पारित, राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद बनेगा कानून; CM मोहन यादव बोले- जो कहा, वो किया

भोपाल। मध्यप्रदेश में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code-UCC) लागू करने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा पेश ‘मध्यप्रदेश समान नागरिक संहिता, 2026’ विधेयक मंगलवार, 21 जुलाई को विधानसभा में ध्वनि मत से पारित हो गया। अब इस विधेयक को आगे की संवैधानिक प्रक्रिया के तहत राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। मंजूरी मिलने के बाद इसे प्रदेश में कानून के रूप में लागू किया जा सकेगा।
विधेयक पारित होने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसे मध्यप्रदेश के इतिहास का महत्वपूर्ण दिन बताते हुए कहा कि उनकी सरकार ने जो संकल्प लिया था, उसे पूरा करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में समानता, सामाजिक न्याय और जनकल्याण की दिशा में लगातार सुधार किए जा रहे हैं और मध्यप्रदेश ने भी समान नागरिक संहिता को लेकर ठोस पहल की है।
विवाह, उत्तराधिकार और अन्य नागरिक मामलों में समान व्यवस्था का दावा
राज्य सरकार का कहना है कि UCC लागू होने के बाद विवाह, उत्तराधिकार, दत्तक ग्रहण और पारिवारिक अधिकारों सहित कई नागरिक मामलों में धर्म के आधार पर अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों की जगह समान कानूनी व्यवस्था लागू करने का प्रयास किया जाएगा।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विधानसभा परिसर में मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद मध्यप्रदेश उन राज्यों की श्रेणी में शामिल होगा, जहां एक से अधिक विवाह को लेकर स्पष्ट कानूनी प्रावधान होंगे। उन्होंने कहा कि एक से ज्यादा विवाह की स्थिति में महिलाओं को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है और सरकार महिलाओं को समान अधिकार तथा सुरक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि केवल विवाह ही नहीं, बल्कि उत्तराधिकार के मामलों में भी पुरुष और महिला को समान अधिकार देने की व्यवस्था की जाएगी। मुख्यमंत्री के अनुसार दत्तक पुत्र से जुड़े अधिकारों सहित नागरिक जीवन के अन्य संबंधित अधिकारों में भी समानता सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा।
एक से अधिक विवाह और महिलाओं के अधिकारों पर जोर
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि उनकी सरकार प्रदेश की महिलाओं को उनके अधिकार दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने दावा किया कि समान नागरिक संहिता लागू होने के बाद विवाह संबंधी कानूनों में समानता आएगी और महिलाओं के हितों की रक्षा मजबूत होगी।
राज्य सरकार ने UCC को नारी सशक्तिकरण से जोड़ते हुए कहा है कि इससे महिलाओं को विवाह, संपत्ति और उत्तराधिकार सहित विभिन्न मामलों में समान अधिकार मिलने का रास्ता मजबूत होगा।
लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर भी प्रावधान
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रस्तावित कानून में लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर भी प्रावधान किए गए हैं। उन्होंने कहा कि निर्धारित कानूनी आयु का उल्लंघन करने या विवाहेतर संबंधों के लिए लिव-इन रिलेशनशिप के दुरुपयोग की स्थिति में दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान रखा गया है।
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि ऐसी परिस्थितियों में दोषी पाए जाने पर पांच वर्ष तक की सजा का प्रावधान हो सकता है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सामाजिक और नैतिक मूल्यों को ध्यान में रखते हुए कानून व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है।
तीन तलाक और हलाला को लेकर भी सरकार का दावा
राज्य सरकार के अनुसार समान नागरिक संहिता लागू होने के बाद सभी धर्मों के नागरिकों के व्यक्तिगत मामलों में समान कानून लागू करने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार का दावा है कि इससे तीन तलाक जैसी प्रथाओं और विवाह से जुड़े अन्य विवादित मामलों को समान कानूनी व्यवस्था के दायरे में लाया जा सकेगा।
हालांकि विधेयक के विभिन्न प्रावधानों की वास्तविक कानूनी स्थिति और उनका क्रियान्वयन राष्ट्रपति की मंजूरी तथा कानून लागू होने के बाद तय नियमों के आधार पर होगा।
सीएम बोले- नैतिक आधार पर चल रही हमारी सरकार
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि उनकी सरकार नैतिक आधार पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में कई सुधार किए जा रहे हैं और मध्यप्रदेश ने भी समान नागरिक संहिता का विधेयक पारित कर सामाजिक सुधार की दिशा में कदम बढ़ाया है।
मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए कहा कि समान नागरिक संहिता के माध्यम से राज्य में समान अधिकार और समान न्याय की व्यवस्था को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है।
कांग्रेस पर साधा निशाना
UCC विधेयक पारित होने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कांग्रेस पर भी राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने सवाल उठाया कि अलग-अलग समुदायों के लिए अलग व्यवस्था की जरूरत क्यों होनी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा, “हम सब भारत मां के लाल, भेदभाव का कहां सवाल।”
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने लंबे समय तक समाज को धार्मिक आधार पर बांटने की राजनीति की। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य धर्म के आधार पर भेदभाव किए बिना नागरिकों के लिए समान कानूनी व्यवस्था लागू करना है।
‘शरिया नहीं, समान कानून होना चाहिए’- मोहन यादव
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने संबोधन में कहा कि मध्यप्रदेश में अलग-अलग धार्मिक व्यवस्थाओं के बजाय समान कानून की व्यवस्था होनी चाहिए। उन्होंने जगदीशपुर और इस्लामपुर का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी सरकार ने पहले भी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान से जुड़े फैसले लिए हैं और अब समान नागरिक संहिता की दिशा में विधानसभा ने महत्वपूर्ण निर्णय किया है।
उन्होंने कहा कि विधानसभा द्वारा समान कानून का समर्थन किया जाना प्रदेश के नागरिकों के जीवन और अधिकारों को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
सोशल मीडिया पर सीएम ने बताया ‘स्वर्णिम अध्याय’
विधेयक पारित होने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि मध्यप्रदेश के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय जुड़ा है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश विधानसभा ने ‘मध्यप्रदेश समान नागरिक संहिता, 2026’ विधेयक को ध्वनि मत से पारित किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि समानता, सामाजिक न्याय और जनकल्याण के संकल्प के साथ सरकार निरंतर काम कर रही है। उन्होंने दावा किया कि यह कानून नारी सशक्तिकरण की नई मिसाल कायम करेगा और समान न्याय, समान अधिकार तथा संवैधानिक मूल्यों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को मजबूत करेगा।
अब आगे क्या होगा?
मध्यप्रदेश विधानसभा से पारित होने के बाद UCC विधेयक को अब आगे की संवैधानिक प्रक्रिया से गुजरना होगा। राज्य सरकार के अनुसार इसे राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलने और आवश्यक अधिसूचना जारी होने के बाद ही इसके प्रावधान प्रदेश में कानून के रूप में प्रभावी हो सकेंगे।
इसके बाद नियम और प्रक्रियाएं तय होने पर यह स्पष्ट होगा कि विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, संपत्ति, दत्तक ग्रहण और लिव-इन रिलेशनशिप सहित विभिन्न मामलों में नए कानून को व्यवहारिक रूप से किस तरह लागू किया जाएगा।
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