देवासनगर निगम

स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में देवास पहले से सातवें स्थान पर फिसला, धूल और औद्योगिक प्रदूषण पर नियंत्रण को लेकर सवाल

निगम का दावा 193 अंकों का, अंतिम मूल्यांकन में मिले 188; जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की निगरानी कितनी प्रभावी रही?

देवास। स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 में देवास अपनी पिछली उपलब्धि बरकरार नहीं रख सका। तीन लाख से कम आबादी वाले शहरों की श्रेणी में पिछले वर्ष पहला स्थान हासिल करने वाला शहर इस बार सातवें पायदान पर पहुंच गया। देवास को 200 में से 188 अंक मिले, जबकि पिछले वर्ष 193 अंक मिले थे। पांच अंक और छह स्थान की गिरावट ने प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों तथा जिम्मेदारों की निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

दावे और अंतिम मूल्यांकन में पांच अंकों का अंतर

नगर निगम ने इस बार सर्वेक्षण के लिए 193 अंकों का दावा किया था, लेकिन अंतिम मूल्यांकन में शहर को 188 अंक ही मिले। इसका मतलब है कि निगम के दावे और मूल्यांकन में स्वीकार किए गए प्रदर्शन के बीच पांच अंकों का अंतर रहा।

हालांकि सार्वजनिक परिणाम सूची में प्रत्येक मद में मिले और काटे गए अंकों का पूरा विवरण नहीं है। किस क्षेत्र में कितने अंक कम हुए, इसका स्पष्ट उत्तर निगम और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की विस्तृत मूल्यांकन रिपोर्ट से ही मिलेगा।

PM10, औद्योगिक उत्सर्जन और निर्माण की धूल बनी चिंता

सर्वेक्षण से संबंधित सामने आई जानकारी में बढ़े PM10 स्तर को अंक प्रभावित होने का कारण बताया गया है। वहीं, शहर के कुछ उद्योगों में बॉयलर के लिए स्वच्छ ईंधन का इस्तेमाल शुरू नहीं हो सका। इससे औद्योगिक प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों और उनके पालन की स्थिति पर सवाल उठते हैं।

उज्जैन रोड, रसूलपुर फ्लाईओवर और एमजी रोड चौड़ीकरण जैसे निर्माण कार्यों से उठने वाली धूल भी चिंता का विषय है। इन कार्यों के दौरान सामग्री ढंकने, नियमित पानी का छिड़काव करने और मलबे का सुरक्षित परिवहन सुनिश्चित करने की व्यवस्था कितनी प्रभावी रही, इसकी समीक्षा जरूरी है।

सड़क की धूल नियंत्रण के सबसे ज्यादा 50 अंक

देवास की जनसंख्या श्रेणी के प्रकाशित मूल्यांकन ढांचे में सड़क की धूल नियंत्रण को सबसे अधिक महत्व दिया गया है।

मूल्यांकन की मद अधिकतम अंक
सड़क की धूल नियंत्रण 50
कचरा और बायोमास जलने की रोकथाम 40
वाहन उत्सर्जन नियंत्रण 30
औद्योगिक उत्सर्जन नियंत्रण 30
अन्य उत्सर्जन नियंत्रण 30
निर्माण एवं तोड़फोड़ के मलबे से प्रदूषण नियंत्रण 10
जनजागरूकता 5
PM10 में सुधार 5
कुल 200
ये अधिकतम निर्धारित अंक हैं, देवास को प्रत्येक मद में मिले अंक नहीं।

सड़क की धूल वाले हिस्से में गड्ढामुक्त सड़कें, पक्के किनारे, पक्की सड़कें, हरित पट्टी और सफाई जैसे बिंदु शामिल हैं। इन कामों में कमी प्रदर्शन को प्रभावित कर सकती है। हालांकि देवास को प्रत्येक मद में कितने अंक मिले, इसका विवरण अभी सामने आना बाकी है।

दूसरे शहरों ने बढ़ाए अंक, देवास पीछे हटा

शहर 2025 के अंक 2026 के अंक 2026 में स्थान
कलिंग नगर 175 198.5 पहला
अंगुल 191 196.5 दूसरा
तालचेर 187.9 193.5 तीसरा
एलुरु 157.5 193 चौथा
हल्दिया 185 190.6 पांचवां
विजयनगरम 185.5 189.5 छठा
देवास 193 188 सातवां
तीन लाख से कम आबादी वाले शहरों की श्रेणी; अंक 200 में से।

इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि देवास की रैंक गिरने के पीछे अपने अंक घटने के साथ प्रतिस्पर्धी शहरों का बेहतर प्रदर्शन भी है। देवास पिछले वर्ष के 193 अंक बनाए रखता, तब भी इस बार एलुरु के साथ संयुक्त चौथे स्थान पर रहता। पहला स्थान बरकरार रखने के लिए प्रदर्शन में और सुधार जरूरी था।

जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की सक्रियता पर सवाल

पिछले वर्ष पहला स्थान मिलने के बाद प्रदूषण नियंत्रण के कार्यों की कितनी नियमित समीक्षा हुई? निर्माण स्थलों पर धूल रोकने के इंतजाम सुनिश्चित कराने के लिए कितने निरीक्षण किए गए? उद्योगों में स्वच्छ ईंधन अपनाने को लेकर दिए निर्देशों का कितना पालन हुआ? परिणाम आने के बाद इन सवालों के जवाब जरूरी हो गए हैं।

जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने स्वच्छ हवा के मुद्दे में कितनी रुचि ली, इसका आकलन बैठकों और घोषणाओं के साथ जमीन पर हुए काम से होना चाहिए। कुछ उद्योगों में स्वच्छ ईंधन का इस्तेमाल शुरू नहीं होना और निर्माण कार्यों से धूल की समस्या बने रहना संबंधित विभागों से जवाब मांगता है।

हालांकि केवल रैंक गिरने से किसी व्यक्ति या विभाग की लापरवाही सिद्ध नहीं होती। जिम्मेदारी तय करने के लिए निरीक्षण रिपोर्ट, समीक्षा बैठकों, जारी निर्देशों और उन पर हुई कार्रवाई का रिकॉर्ड सामने आना चाहिए। इससे स्पष्ट होगा कि कमी काम पूरा करने में रही, निगरानी में या मूल्यांकन के लिए प्रस्तुत प्रमाणों में।

इंदौर दूसरे, जबलपुर तीसरे और भोपाल चौथे स्थान पर

दस लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की अलग श्रेणी में लखनऊ 198 अंकों के साथ पहले, इंदौर 197 अंकों के साथ दूसरे और जबलपुर 195 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर रहा। भोपाल तथा आगरा 192 अंकों के साथ संयुक्त चौथे स्थान पर हैं। तीन से दस लाख आबादी वाली श्रेणी में राउरकेला ने पहला स्थान प्राप्त किया।

वार्ड-26 को राज्यस्तरीय सूची में जगह

देवास के लिए सकारात्मक पहलू यह है कि वार्ड-26 को दस हजार से कम आबादी वाली श्रेणी की राज्यस्तरीय पुरस्कार सूची में जगह मिली है। शहर के समग्र प्रदर्शन में सुधार के लिए अब मदवार अंक, कमियों और उन्हें दूर करने की समयसीमा सार्वजनिक करना जरूरी है, ताकि अगले सर्वेक्षण से पहले काम की प्रगति देखी जा सके।

सौरभ सचान

सौरभ सचान देवास लाइव (dewaslive.com) के संपादक एवं प्रमुख हैं। देवास लाइव मध्यप्रदेश के देवास जिले से प्रकाशित एक प्रमुख डिजिटल हिंदी न्यूज़ प्लेटफ़ॉर्म है, जो स्थानीय खबरों, सामाजिक मुद्दों और जनहित से जुड़ी घटनाओं को निष्पक्ष और सटीक रूप में प्रस्तुत करता है। सौरभ सचान की पत्रकारिता का उद्देश्य स्थानीय आवाज़ों को सामने लाना और देवास की जमीनी सच्चाई को जनता तक पहुँचाना है।

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