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खेल के नाम पर ‘बड़ा खेल’: निलंबित डीईओ ने चहेतों पर लुटाई करोड़ों की सरकारी राशि, विश्वामित्र अवॉर्डी सुदेश सांगते भी शामिल!

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देवास (Dewas News): मध्य प्रदेश के देवास जिले के शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने सिस्टम की पोल खोल कर रख दी है। यहाँ शिक्षा और “खेल के नाम पर एक बहुत बड़ा खेल” खेला गया है। तत्काल प्रभाव से निलंबित किए गए जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) एच.एस. भारती पर आरोप है कि उन्होंने बिना किसी नियम-कानून के अपने चहेतों को सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये की राशि बांट दी।

​सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि बिना किसी प्रावधान के बांटी गई लाखों रुपये की इस एडवांस (अग्रिम) राशि के लाभार्थियों में विश्वामित्र अवॉर्ड से सम्मानित सुदेश सांगते का नाम भी प्रमुखता से शामिल है। जांच रिपोर्ट के खुलासे के बाद शिक्षा और खेल जगत में हड़कंप मच गया है कि आखिर कैसे एक सम्मानित खेल पुरस्कार विजेता भी इस वित्तीय अनियमितता का हिस्सा बन गया।

मध्य प्रदेश के देवास जिले के शिक्षा विभाग में बड़े पैमाने पर हुई वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार पर प्रशासन ने सख्त चाबुक चलाया है। कलेक्टर कार्यालय की जांच रिपोर्ट के आधार पर देवास के जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) श्री एच.एस. भारती को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। डीईओ पर बिना टेंडर प्रक्रिया के करोड़ों रुपये खर्च करने, मनमाने ढंग से चहेतों को लाखों रुपये का एडवांस बांटने और सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने के गंभीर आरोप जांच में सही पाए गए हैं।


लगातार मिल रही थीं शिकायतें, जांच में खुली पोल
देवास कलेक्टर कार्यालय द्वारा जारी प्रतिवेदन (दिनांक 24.03.2026) के अनुसार, शिक्षा कार्यालय के विरुद्ध लगातार वित्तीय गड़बड़ियों की शिकायतें प्राप्त हो रही थीं। इन शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए जिला स्तर पर एक जांच टीम का गठन किया गया। जांच दल ने जब दस्तावेजों का परीक्षण किया, तो बड़े पैमाने पर भंडार क्रय नियमों की धज्जियां उड़ती हुई पाई गईं। इस संबंध में जब डीईओ एच.एस. भारती और अन्य कर्मचारियों से जवाब मांगा गया, तो उनका जवाब बेहद असंतोषजनक पाया गया। साथ ही, मांगे जाने पर उन्होंने जांच दल को आवश्यक रिकॉर्ड भी उपलब्ध नहीं कराए।


करोड़ों के अनुरक्षण और खेल बजट में जमकर हुई मनमानी
जांच रिपोर्ट में सामने आया है कि शिक्षा विभाग में शासन स्तर से प्राप्त करोड़ों रुपये की राशि बिना ई-टेंडर और निविदा प्रक्रिया के खर्च कर दी गई।

राष्ट्रीय क्रीड़ा प्रतियोगिता: 68वीं राष्ट्रीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता (2024-25) के लिए 20.00 लाख रुपये आवंटित हुए थे। इसमें से परिवहन पर 2,50,710 रुपये और टेंट हाउस को 5,49,290 रुपये का भुगतान बिना ई-टेंडर और विहित प्रक्रिया के कर दिया गया। 69वीं क्रीड़ा प्रतियोगिता के लिए भी 8 लाख रुपये अलग से मिले थे।

स्कूल अनुरक्षण (Maintenance) कार्य: वर्ष 2023-24 में प्रति शाला 3 लाख रुपये के मान से कुल 1,86,67,307 रुपये और वर्ष 2024-25 में 1,83,85,536 रुपये प्राप्त हुए थे। इतने बड़े बजट का खर्च सीमित निविदा बुलाकर किया जाना था, लेकिन नियमों को दरकिनार कर मनमाने ढंग से राशि व्यय की गई।


चहेतों को बांटी गई 28 लाख से अधिक की एडवांस राशि
सरकारी नियमों में किसी भी कर्मचारी को अग्रिम (Advance) राशि देने का प्रावधान नहीं है, इसके बावजूद वर्ष 2024-25 में मात्र 7 महीनों के भीतर क्रीड़ा निधि से 28,89,138 रुपये का एडवांस बांट दिया गया। यह राशि भारती नेव्या (16,02,682 रुपये), सुदेश सांगते (6,35,380 रुपये), सुनील कुमार चौधरी (3,00,000 रुपये), अभिमन्यु यादव (1,83,000 रुपये) और विधि शाखा प्रभारी सहज सरकार (1,68,076 रुपये) को दी गई। जांच दल द्वारा निर्देश मांगने पर डीईओ कोई भी नियम प्रस्तुत नहीं कर सके।


जीएसटी (GST) और टीडीएस (TDS) की भी चोरी
वित्तीय अनियमितताओं का सिलसिला यहीं नहीं रुका। परीक्षा निधि कैशबुक से 2024-25 में बिना नियम के 7,13,521 रुपये खर्च किए गए। इसके अलावा ‘वेस्ट ईक्यूपमेंट सिस्टम देवास’ के तहत 3,98,700 रुपये के कंप्यूटर और 1,85,987 रुपये वाहन मरम्मत पर बिना भंडार क्रय नियमों का पालन किए खर्च कर दिए गए। चौंकाने वाली बात यह रही कि इन सभी भुगतानों में शासन के नियमानुसार अनिवार्य 2 प्रतिशत जीएसटी (GST) और टीडीएस (TDS) की कटौती भी नहीं की गई।


डीईओ पर गिरी गाज, अजय मिश्रा को मिला प्रभार
कलेक्टर की रिपोर्ट के आधार पर स्पष्ट हुआ कि श्री एच.एस. भारती की मिलीभगत से इस पूरी अनियमितता को अंजाम दिया जा रहा था। इसे मध्य प्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के तहत घोर लापरवाही, उदासीनता और कदाचरण माना गया।
इन गंभीर आरोपों के चलते म.प्र. सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के नियम 9(1)(क) के तहत श्री एच.एस. भारती को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय संयुक्त संचालक, लोक शिक्षण, उज्जैन संभाग रहेगा। आगामी व्यवस्था होने तक जिला शिक्षा अधिकारी देवास का प्रभार अब जिला परियोजना समन्वयक (DPC)  अजय मिश्रा को सौंपा गया है।

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