
इंदौर नगर निगम वंदे मातरम विवाद: देवास में कांग्रेस की ‘गुप्त’ बैठक में पार्षदों की पेशी, FIR के बाद अब संगठन की जांच तेज
देवास/इंदौर। इंदौर नगर निगम के बजट सत्र में ‘वंदे मातरम’ को लेकर उठा विवाद अब कानूनी गलियारों से निकलकर राजनीतिक गलियारों में पूरी तरह गरमा गया है। धार्मिक कारणों का हवाला देकर राष्ट्रीय गीत गाने से इनकार करने वाली पार्षद फौजिया शेख अलीम और निर्दलीय पार्षद रुबीना इकबाल खान की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। इंदौर पुलिस द्वारा दोनों पार्षदों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 196(1) के तहत मामला दर्ज किए जाने के बाद, अब कांग्रेस संगठन ने भी इस मामले में कड़ा रुख अपनाया है।
देवास में हुई हाई-प्रोफाइल बैठक
मंगलवार को इस पूरे विवाद को लेकर देवास में एक महत्वपूर्ण और गुप्त बैठक आयोजित की गई। यह बैठक देवास शहर कांग्रेस अध्यक्ष प्रयास गौतम के एक निजी स्कूल परिसर में रखी गई थी। मध्यप्रदेश कांग्रेस के प्रभारी हरीश चौधरी द्वारा गठित विशेष जांच कमेटी के सदस्य और राष्ट्रीय सचिव संजय दत्त व उषा नायडू ने यहाँ पहुंचकर मामले की पड़ताल की।
वन-टू-वन चर्चा और सफाई
बैठक के दौरान कमेटी ने पार्षद फौजिया शेख अलीम और रुबीना इकबाल खान से बंद कमरे में ‘वन-टू-वन’ चर्चा की। सूत्रों के अनुसार, संगठन ने पार्षदों से उस घटनाक्रम पर लिखित और मौखिक सफाई मांगी है जिसने भाजपा को राष्ट्रीय स्तर पर मुद्दा बनाने का मौका दे दिया। इस दौरान इंदौर शहर अध्यक्ष चिंटू चौकसे, वरिष्ठ नेता केके मिश्रा और अमीनुल खान सूरी को भी विशेष तौर पर बुलाया गया था ताकि स्थानीय समीकरणों और घटना की गंभीरता को समझा जा सके।
मीडिया से बनाई दूरी
बैठक की संवेदनशीलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि घंटों चली चर्चा के बाद जब नेता और पार्षद बाहर आए, तो उन्होंने मीडिया से दूरी बनाए रखी। सवालों की बौछार के बीच किसी भी नेता ने आधिकारिक बयान नहीं दिया और सभी अपनी गाड़ियों में बैठकर चुपचाप निकल गए। माना जा रहा है कि पार्टी इस मामले में फूंक-फूंक कर कदम रख रही है ताकि आगामी चुनावों में हिंदुत्व के मुद्दे पर भाजपा को बढ़त न मिले।
क्या है पूरा मामला?
विवाद की शुरुआत 8 अप्रैल 2026 को इंदौर नगर निगम के बजट सम्मेलन के दौरान हुई थी। परंपरा के अनुसार वंदे मातरम का गायन शुरू हुआ, लेकिन पार्षद फौजिया और रुबीना ने इसका हिस्सा बनने से इनकार कर दिया। भाजपा पार्षदों ने इसे राष्ट्रगीत का अपमान बताते हुए सदन में जमकर हंगामा किया और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। भाजपा का आरोप है कि यह कृत्य समूहों के बीच वैमनस्य बढ़ाने और राष्ट्रीय प्रतीकों के अनादर की श्रेणी में आता है।
एक हफ्ते में आएगी रिपोर्ट
प्रदेश प्रभारी द्वारा बनाई गई यह कमेटी अपनी विस्तृत रिपोर्ट एक सप्ताह के भीतर आलाकमान को सौंपेगी। रिपोर्ट के आधार पर तय होगा कि कांग्रेस इन पार्षदों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करेगी या उनका बचाव करेगी। फिलहाल, एफआईआर दर्ज होने और संगठन की सख्ती के बाद दोनों पार्षदों के राजनीतिक भविष्य पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
