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देवास में अगस्त की बारिश 53% कम, पानी मांगने लगी सोयाबीन; 25-26 अगस्त को राहत की उम्मीद

सीजन की कुल बारिश सामान्य के करीब, लेकिन लंबे सूखे अंतराल से खेतों में नमी का संकट; मध्यम अल नीनो सक्रिय होने से मानसून का खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं

देवास। करीब एक सप्ताह से देवास और आसपास के मालवा क्षेत्र में अच्छी बारिश नहीं होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। कई स्थानों पर सोयाबीन की फसल फूल और फलियां बनने की अवस्था में है। इस समय पानी की कमी होने पर फूल झड़ने, फलियां कम बनने और दाना कमजोर रहने का खतरा बढ़ जाता है। खेतों की ऊपरी मिट्टी सूखने लगी है और असिंचित क्षेत्रों में फसल मुरझाने की स्थिति बन सकती है।

कुल बारिश सामान्य के पास, लेकिन अगस्त में बड़ा अंतर

भारत मौसम विज्ञान विभाग के जिला वर्षा आंकड़ों के अनुसार 23 अगस्त तक देवास जिले में 1 जून से कुल 647.1 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई है। इस अवधि की सामान्य बारिश 670.5 मिलीमीटर है। यानी पूरे मानसून सीजन का अंतर अभी केवल 3 प्रतिशत कम है।

इसके उलट अगस्त की तस्वीर चिंताजनक है। 1 से 23 अगस्त के बीच देवास जिले में केवल 113.9 मिलीमीटर बारिश हुई, जबकि इस अवधि में सामान्य रूप से 241.6 मिलीमीटर पानी गिरना चाहिए था। इस तरह अगस्त में बारिश सामान्य से 53 प्रतिशत कम रही। सीधे शब्दों में कहें तो अगस्त के शुरुआती 23 दिनों में जिले को सामान्य से करीब 127.7 मिलीमीटर कम पानी मिला। IMD के जिला वर्षा आंकड़े

इससे साफ है कि सीजन की शुरुआत में हुई बारिश के कारण कुल आंकड़ा सामान्य दिखाई दे रहा है, लेकिन बारिश का वितरण असमान रहा है। खेती के लिए केवल कुल बारिश नहीं, बल्कि जरूरत के समय पानी मिलना भी जरूरी है। लगातार कई दिन बारिश नहीं होने से खेतों में कृषि सूखे जैसी स्थिति बन सकती है, भले ही जिले का कुल वर्षा आंकड़ा सामान्य के पास हो।

क्या देवास में सूखे का खतरा है?

मौजूदा आंकड़ों के आधार पर पूरे जिले को अभी सूखाग्रस्त कहना जल्दबाजी होगी, क्योंकि कुल मानसूनी बारिश सामान्य से सिर्फ 3 प्रतिशत कम है। इसके बावजूद अगस्त की 53 प्रतिशत कमी और खेतों में घटती नमी सोयाबीन के लिए गंभीर चेतावनी है।

मई में जारी IMD के अपडेटेड मानसून पूर्वानुमान में देशभर में मानसूनी बारिश दीर्घावधि औसत की 90 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया था। सामान्य से कम या अत्यधिक कम बारिश की संयुक्त संभावना 84 प्रतिशत बताई गई थी। मध्य भारत में सामान्य से कम बारिश की संभावना 43 प्रतिशत, सामान्य बारिश की 33 प्रतिशत और सामान्य से अधिक बारिश की संभावना 24 प्रतिशत रखी गई थी। IMD का मानसून पूर्वानुमान

हालांकि वास्तविक स्थिति कुछ बेहतर रही है। 19 अगस्त तक मध्य भारत में सीजन की कुल बारिश सामान्य से केवल 1 प्रतिशत कम थी। इसका मतलब यह है कि पूरे मध्य भारत में व्यापक सूखा नहीं है, लेकिन देवास जैसे इलाकों में बारिश के लंबे अंतराल से फसलों पर स्थानीय स्तर पर नमी का संकट पैदा हो सकता है।

अल नीनो सक्रिय, लेकिन हर जगह बारिश बंद होना जरूरी नहीं

IMD की 20 अगस्त की विस्तारित अवधि रिपोर्ट के अनुसार भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में इस समय मध्यम अल नीनो की स्थिति बनी हुई है और शेष मानसून सीजन में इसके और मजबूत होने का अनुमान है। अल नीनो सामान्य रूप से भारतीय मानसून को कमजोर करने वाले कारकों में माना जाता है।

फिर भी अल नीनो का अर्थ यह नहीं है कि हर क्षेत्र में बारिश बंद हो जाएगी। बंगाल की खाड़ी में बनने वाले कम दबाव के क्षेत्र, मानसून ट्रफ और स्थानीय मौसम प्रणालियां मध्य प्रदेश में अच्छी बारिश करा सकती हैं। फिलहाल हिंद महासागर द्विध्रुव यानी IOD तटस्थ है। IMD का 20 अगस्त का विस्तारित पूर्वानुमान

25 और 26 अगस्त को राहत मिलने की संभावना

24 अगस्त को जारी IMD चेतावनी के अनुसार पश्चिमी मध्य प्रदेश में 24 अगस्त को भारी, 25 अगस्त को बहुत भारी और 26 अगस्त को फिर भारी बारिश की संभावना जताई गई है। बारिश के साथ गरज-चमक और बिजली गिरने का खतरा भी बताया गया है। IMD पश्चिमी मध्य प्रदेश चेतावनी

IMD की विस्तारित रिपोर्ट में भी 20 से 26 अगस्त के दौरान मध्य भारत में बारिश की गतिविधियां सामान्य से अधिक रहने का अनुमान है। इससे देवास और मालवा में मानसून के दोबारा सक्रिय होने की उम्मीद बनी है। हालांकि यह चेतावनी पूरे पश्चिमी मध्य प्रदेश के लिए है। भारी बारिश कुछ स्थानों पर ही हो सकती है और यह जरूरी नहीं कि जिले के प्रत्येक गांव में एक समान पानी गिरे।

27 अगस्त से 2 सितंबर के सप्ताह में पूर्वी तथा आसपास के मध्य भारत में सामान्य से अधिक बारिश की संभावना है, जबकि बाकी क्षेत्रों के लिए संकेत मिले-जुले हैं। इसलिए आने वाले दो से तीन दिन देवास की सोयाबीन फसल के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

फसल बचाने के लिए किसान क्या करें?

ICAR-राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान, इंदौर ने 17 से 23 अगस्त की सलाह में किसानों से कहा है कि लंबे सूखे अंतराल की स्थिति में मिट्टी में दरारें पड़ने का इंतजार नहीं करें। सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होने पर स्प्रिंकलर, ड्रिप या परंपरागत तरीके से जीवनरक्षक सिंचाई की जा सकती है। ICAR-NSRI की साप्ताहिक सोयाबीन सलाह

किसानों को इन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए—

  • सिंचाई का निर्णय केवल खेत की ऊपरी सतह देखकर नहीं, जड़ वाले हिस्से की नमी और फसल के मुरझाने के लक्षण देखकर लें।
  • बारिश का तत्काल पूर्वानुमान होने पर पहले स्थानीय मौसम और नाउकास्ट की जानकारी देखें। पर्याप्त नमी वाले खेत में भारी बारिश से ठीक पहले सिंचाई करने से जलभराव हो सकता है।
  • जिन खेतों में नमी तेजी से खत्म हो रही है और पौधे मुरझाने लगे हैं, वहां कृषि विशेषज्ञ की सलाह से हल्की जीवनरक्षक सिंचाई करें। खेत को पानी से भरने से बचें।
  • संभावित तेज बारिश को देखते हुए खेत की नालियां और जल निकासी मार्ग साफ रखें। सोयाबीन लंबे समय तक जलभराव सहन नहीं कर पाती।
  • बारिश से ठीक पहले कीटनाशक, फफूंदनाशक या उर्वरक का छिड़काव नहीं करें। पानी भरे खेत में भी कृषि कार्य रोक देना चाहिए।
  • खेत के तीन-चार अलग-अलग स्थानों पर पौधों को नियमित रूप से देखकर इल्ली, सफेद मक्खी, तना मक्खी, पीला मोजेक और फफूंदजनित रोगों की निगरानी करें।
  • बिना वैज्ञानिक अनुशंसा के कीटनाशकों या फफूंदनाशकों का मिश्रण नहीं बनाएं। दवा का चयन स्थानीय कृषि अधिकारी, कृषि विज्ञान केंद्र या सोयाबीन अनुसंधान संस्थान की सलाह से ही करें।

प्रशासन को भी गांववार निगरानी की जरूरत

बारिश का वितरण अलग-अलग होने के कारण केवल जिला औसत के आधार पर फसल की स्थिति तय नहीं की जा सकती। कृषि विभाग को गांववार नमी और फसल की स्थिति का सर्वे कराना चाहिए। जिन क्षेत्रों में सिंचाई के साधन मौजूद हैं, वहां किसानों को समय पर बिजली और पानी उपलब्ध कराने की व्यवस्था जरूरी है। कृषि विज्ञान केंद्र और कृषि विभाग को मौसम आधारित दैनिक सलाह गांवों तक पहुंचानी चाहिए।

यदि आने वाले दो-तीन दिनों में अनुमान के अनुसार बारिश होती है तो सोयाबीन को बड़ी राहत मिल सकती है। लेकिन बारिश फिर टलती है या बहुत सीमित क्षेत्र में होती है तो असिंचित खेतों में उत्पादन प्रभावित होने का खतरा बढ़ जाएगा।

फिलहाल घबराने से ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत

देवास जिले का कुल वर्षा आंकड़ा अभी सामान्य के करीब है, इसलिए व्यापक सूखे की स्थिति नहीं कही जा सकती। असली चिंता अगस्त की 53 प्रतिशत कमी और बारिश का लंबा अंतराल है। अगले 72 घंटे में बारिश की अच्छी संभावना राहत का संकेत है, लेकिन मध्यम अल नीनो और मानसून के असमान वितरण को देखते हुए सितंबर तक सतर्कता जरूरी रहेगी।

सौरभ सचान

सौरभ सचान देवास लाइव (dewaslive.com) के संपादक एवं प्रमुख हैं। देवास लाइव मध्यप्रदेश के देवास जिले से प्रकाशित एक प्रमुख डिजिटल हिंदी न्यूज़ प्लेटफ़ॉर्म है, जो स्थानीय खबरों, सामाजिक मुद्दों और जनहित से जुड़ी घटनाओं को निष्पक्ष और सटीक रूप में प्रस्तुत करता है। सौरभ सचान की पत्रकारिता का उद्देश्य स्थानीय आवाज़ों को सामने लाना और देवास की जमीनी सच्चाई को जनता तक पहुँचाना है।

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