
पुलिस जांच में निर्माण से बिक्री तक के नेटवर्क का खुलासा; 10 आरोपी गिरफ्तार, कलेक्टर-एसपी हटाए गए और तीन आबकारी अधिकारी निलंबित
देवास। चंदाना शराबकांड की जांच में नकली शराब तैयार करने और उसे लाइसेंसी शराब की पेटियों में मिलाकर बेचने का मामला सामने आया है। पत्रिका में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, आरोपियों ने इंदौर से केमिकल मंगवाकर पानी के साथ शराब जैसा मिश्रण तैयार किया। इसे असली जैसी दिखने वाली बोतलों में भरकर लाइसेंसी दुकानों से खरीदी गई शराब की पेटियों में मिलाया गया। पुलिस के मुताबिक, यह शराब चंदाना-बिजाना क्षेत्र में बेची गई।
मामले में पुलिस ने विनोद जायसवाल सहित 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर प्रकरण में आबकारी अधिनियम की धारा 49-क भी जोड़ी गई है। दूसरी ओर, शासन ने देवास के कलेक्टर और एसपी को हटाने के साथ आबकारी विभाग के तीन अधिकारियों को निलंबित किया है।
इंदौर से आया केमिकल, दो मकानों में तैयार हुआ मिश्रण
रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस जांच में सामने आया कि 1 अक्टूबर को इंदौर की लोहा मंडी स्थित महावीर मार्केट के एक गोदाम से केमिकल मंगवाया गया था। इसकी बुकिंग दवा बाजार स्थित गोदाम संचालक के कार्यालय से कराई गई थी।
पुलिस के अनुसार, इंदौर के पुवालदाई गांव में अजय राठौर के मकान और लोहारपीपल्या में उसके साथी गोविंद के मकान पर केमिकल में पानी मिलाकर मिश्रण तैयार किया गया। इसके बाद उसे लाइसेंसी शराब जैसी दिखने वाली बोतलों में भरा गया।
ऑनलाइन और एआई की मदद से सीखी प्रक्रिया
कोतवाली टीआई शशिकांत चौरसिया के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया है कि नकली शराब बनाने का मुख्य आरोपी अजय राठौर पुवालदाई का निवासी है। आरोप है कि उसने ऑनलाइन सर्च और एआई की मदद से शराब बनाने की प्रक्रिया की जानकारी जुटाई थी।
जांच के मुताबिक, अजय ने कई बार ऑनलाइन खोज की और एक केमिकल आपूर्तिकर्ता के यहां बुकिंग कराई। केमिकल की डिलीवरी 1 अक्टूबर को उसके घर हुई। पुलिस का आरोप है कि उसने साथियों के साथ मिलकर घर में नकली शराब तैयार की और खाली बोतलों में भरकर अवैध रूप से बेची।
क्षिप्रा और भड़ापीपल्या की दुकानों से खरीदी थीं पेटियां
पुलिस जांच के अनुसार, आरोपियों ने क्षिप्रा और भड़ापीपल्या स्थित लाइसेंसी शराब दुकानों से शराब की पेटियां खरीदी थीं। आरोप है कि इन्हीं पेटियों में केमिकल से तैयार नकली शराब की कुछ बोतलें मिला दी गईं। इसके बाद शराब चंदाना-बिजाना क्षेत्र में अवैध रूप से बेची गई।
पुलिस के मुताबिक, यह बिक्री लगभग 6-7 अक्टूबर से 11-12 अक्टूबर के बीच हुई। जांच में नकली शराब तैयार करने, बोतलों को पेटियों में मिलाने और बिक्री तक पहुंचाने की प्रक्रिया में अलग-अलग लोगों की भूमिका खंगाली जा रही है।
चंदाना की शासकीय शराब दुकान के सेल्समैन जितेंद्र मालवीय और राहुल गिरी गोस्वामी को भी आरोपी बनाया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों की तलाश जारी थी।
10 आरोपी गिरफ्तार, दो जेल और आठ रिमांड पर
कोतवाली पुलिस ने विनोद जायसवाल सहित 10 लोगों को गिरफ्तार किया है। रिपोर्ट में गिरफ्तार आरोपियों के नाम इस प्रकार बताए गए हैं:
- विनोद जायसवाल
- अजय उर्फ अज्जू राठौर
- रामेश्वर सोनगरा
- शराब दुकान मैनेजर नितिन सोलंकी
- चंद्रशेखर बैरागी
- सेल्समैन सतेंद्र ओझा
- राजदेव पटेल
- जुगल सिंह
- राजेंद्र निनामा
- विशाल चौहान
रिपोर्ट के मुताबिक, मंगलवार को सभी आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया। न्यायालय ने जुगल सिंह और राजेंद्र निनामा को जेल भेज दिया, जबकि विनोद जायसवाल सहित आठ आरोपियों को तीन दिन की पुलिस रिमांड पर सौंपा।
पुलिस रिमांड के दौरान केमिकल की खरीद, नकली शराब तैयार करने, लाइसेंसी पेटियों में बोतलें मिलाने और वितरण नेटवर्क से जुड़े पहलुओं की जांच की जा रही है।
आबकारी अधिनियम की धारा 49-क जोड़ी
पुलिस ने शुरुआत में अवैध शराब की जब्ती के मामले में आबकारी अधिनियम, 1915 की धारा 34(2) के तहत प्रकरण दर्ज किया था। रिपोर्ट के अनुसार, जांच में मानव उपयोग के लिए अनुपयुक्त शराब तैयार करने और बेचने से जुड़े तथ्य सामने आने के बाद धारा 49-क भी जोड़ी गई।
कलेक्टर-एसपी हटाए गए, नए अधिकारियों की नियुक्ति
चंदाना में मौतों और लोगों की आंखों की रोशनी जाने की घटनाओं के बाद प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठे। रिपोर्ट के अनुसार, 16 अक्टूबर को मौतों की जानकारी सामने आने के बाद पुलिस और आबकारी विभाग की टीमें जांच कर रही थीं। मृतकों के परिजन लगातार शराब पीने से मौत होने का आरोप लगाते रहे, जबकि शुरुआती दौर में प्रशासन और पुलिस इस संबंध को स्वीकार नहीं कर रहे थे।
मामला बढ़ने पर शासन ने देवास कलेक्टर ऋतुराज सिंह और एसपी पुनीत गेहलोत को हटाकर भोपाल पदस्थ कर दिया। सिवनी कलेक्टर नेहा मीना को देवास कलेक्टर और बालाघाट एसपी आदित्य मिश्रा को देवास एसपी बनाया गया।
आबकारी विभाग के तीन अधिकारी निलंबित
आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना ने जिला आबकारी अधिकारी बसंती भूरिया को निलंबित किया। रिपोर्ट के अनुसार, उन पर अवैध शराब के निर्माण और बिक्री पर प्रभावी नियंत्रण नहीं रखने तथा अधीनस्थ अमले की निगरानी में लापरवाही के आरोप हैं। उन्हें उपायुक्त आबकारी कार्यालय, उज्जैन से संबद्ध किया गया है।
सहायक जिला आबकारी अधिकारी निलेश कुमार पवार और आबकारी उपनिरीक्षक राजश्री खन्ना को भी निलंबित किया गया। सहायक आबकारी आयुक्त मुख्यालय राकेश कुमार कुर्मी को देवास में सहायक आबकारी आयुक्त के पद पर पदस्थ किया गया है।
संभागीय जांच दल ने गांव पहुंचकर दर्ज किए बयान
उज्जैन संभागायुक्त आशीष सिंह द्वारा गठित विशेष जांच दल ने मंगलवार को चंदाना पहुंचकर मृतकों के परिजनों से मुलाकात की। दल में उज्जैन के अपर कलेक्टर प्रथम कौशिक, गरोठ एएसपी रामस्नेही मिश्रा, सैलाना एसडीओपी लेखराज मीणा और उज्जैन के उप आबकारी आयुक्त हर्षवर्धन राय सहित अन्य अधिकारी शामिल थे।
जांच दल ने परिजनों के बयान दर्ज किए। अधिकारियों ने शराब खरीदने के स्थान, पीड़ितों को मिले उपचार और घटनाक्रम के बारे में जानकारी ली। पूछताछ के दौरान वीडियोग्राफी भी की गई।
कांग्रेस का प्रदर्शन, हत्या का प्रकरण दर्ज करने की मांग
इस मामले को लेकर कांग्रेस ने मंगलवार को देवास कलेक्टरेट पर प्रदर्शन किया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मृतकों की मौत को हत्या बताते हुए आरोपियों के खिलाफ हत्या का प्रकरण दर्ज करने की मांग की।
पटवारी ने जांच की दिशा पर सवाल उठाते हुए पूछा कि शराब पीने के बाद हुई मौतों के मामले में पानी के सैंपल क्यों लिए जा रहे हैं। उन्होंने शराब ठेकेदारों और डिस्टिलरी संचालकों को संरक्षण मिलने तथा पुलिस की शह पर अवैध शराब बिकने का आरोप भी लगाया। ये आरोप कांग्रेस की ओर से लगाए गए हैं।
पटवारी ने चेतावनी दी कि हत्या का मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई नहीं की गई तो देवास में उज्जैन तक पदयात्रा कर विरोध जताया जाएगा।
शहर कांग्रेस अध्यक्ष प्रयास गौतम और ग्रामीण जिलाध्यक्ष मनोज चौधरी के नेतृत्व में गांधी प्रतिमा से कलेक्टर कार्यालय तक रैली निकाली गई। प्रदर्शन में पूर्व मंत्री सज्जनसिंह वर्मा, कांग्रेस पदाधिकारी और मृतकों के परिजन भी शामिल हुए।



