
₹8.80 लाख देकर खरीदी थी टाटा पंच, डिलीवरी के दिन से खराबी का आरोप; औद्योगिक क्षेत्र थाने में मामला दर्ज
देवास। न्यायालय में पदस्थ एक महिला अभियोजन अधिकारी को अपनी नई कार के लिए लंबी लड़ाई लड़नी पड़ रही है। पूरा भुगतान करने और बैंक की किस्तें चुकाने के बावजूद वे वाहन का उपयोग नहीं कर पा रही हैं। सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी अलका राणा का आरोप है कि उन्हें शुरुआत से खराब कार दी गई और शिकायतों के बावजूद समस्या का समाधान नहीं किया गया। उनके मुताबिक, मई 2025 में वापस की गई कार करीब डेढ़ साल से उसी शोरूम में खड़ी है।
इस मामले में औद्योगिक क्षेत्र थाना पुलिस ने शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) के तहत धोखाधड़ी का अपराध दर्ज किया है। शिकायत में जगदीश टाटा मोटर्स शोरूम के मालिक, मैनेजर अभय राव और वर्कशॉप मैनेजर गुरविंदर सिंह पर खराब वाहन को सही बताकर देने और पूरी रकम वसूलने के आरोप लगाए गए हैं।
डिलीवरी के दिन ही सामने आई परेशानी
शिकायत के अनुसार, अलका राणा 19 मई 2025 को देवास स्थित जगदीश टाटा मोटर्स शोरूम पर अपनी नई टाटा पंच ऑटोमैटिक कार की डिलीवरी लेने पहुंची थीं। वाहन के लिए उन्होंने पंजीयन, बीमा और अन्य खर्च सहित कुल ₹8.80 लाख का भुगतान किया था। कार बैंक से फाइनेंस कराई गई थी।
राणा का आरोप है कि पूजा के दौरान ही कार में पर्याप्त ताकत नहीं होने का संकेत मिल गया था। वाहन आगे बढ़ाने पर पहिए के नीचे रखा नारियल भी आसानी से नहीं फूटा। शिकायत में कहा गया है कि कर्मचारियों ने इसे नया और कठोर नारियल होने की बात कहकर टाल दिया।
सड़क पर भी 12 किलोमीटर की रफ्तार से चलती रही कार
FIR में दर्ज शिकायत के मुताबिक, शोरूम का कर्मचारी अमान शेख कार चला रहा था और राणा बगल की सीट पर बैठी थीं। सड़क पर निकलने के बाद भी कार लगभग 12 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से ही चल रही थी।
राणा के अनुसार, सवाल करने पर कर्मचारी ने कहा कि नई कार को ज्यादा रफ्तार से चलाने पर इंजन पर लोड पड़ता है। बाद में वर्कशॉप मैनेजर और अन्य कर्मचारियों को बुलाया गया। आरोप है कि बोनट खोलकर जांच और कुछ काम करने के बाद रफ्तार सामान्य हुई, लेकिन मीटर पर इंजन की चेतावनी का निशान बना रहा।
अगले दिन वर्कशॉप पहुंची नई कार
शिकायत में बताया गया है कि 20 मई 2025 को कार इंदौर की वर्कशॉप ले जाई गई। वहां काम करने के बाद वाहन ठीक होने की बात कही गई। राणा का आरोप है कि नई कार को खरीदने के अगले ही दिन मरम्मत की जरूरत पड़ने पर उन्होंने आपत्ति जताई और वाहन वापस लेने की मांग की।
उनके मुताबिक, 21 मई 2025 को वे कार वापस देवास के शोरूम लेकर पहुंचीं। वहां शिकायत करने के बाद वाहन खड़ा कर चाबी कर्मचारी को सौंप दी। शिकायत में कार शोरूम के अंदर खड़ी किए जाने के संदेश और वीडियो सुरक्षित होने का भी उल्लेख है।
कार का उपयोग नहीं, बैंक की किस्तें जारी
राणा का कहना है कि कार खरीदने के बाद उन्हें सुविधा मिलने के बजाय आर्थिक और मानसिक परेशानी झेलनी पड़ी। वाहन का उपयोग नहीं कर पाने के बावजूद बैंक की किस्तों की जिम्मेदारी बनी रही। पहले उपलब्ध कराए गए परिवाद में मासिक किस्त ₹13,360 बताई गई है।
उनके मुताबिक, कंपनी के टोल फ्री नंबर और शोरूम प्रबंधन से शिकायत करने पर समाधान के आश्वासन मिले, लेकिन वाहन बदलने अथवा रकम लौटाने की मांग पूरी नहीं हुई। अब भी कार शोरूम में खड़ी होने और उसका उपयोग नहीं कर पाने की बात उन्होंने कही है।
खराबी जानते हुए सही वाहन बताने का आरोप
राणा ने शिकायत में आरोप लगाया है कि शोरूम के संबंधित लोगों को वाहन में खराबी की जानकारी थी, फिर भी उसे सही बताकर उन्हें सौंपा गया। पुलिस ने शिकायत पर धोखाधड़ी का अपराध दर्ज किया है।
मामले में शोरूम प्रबंधन और संबंधित व्यक्तियों का विस्तृत पक्ष उपलब्ध नहीं है। FIR में दर्ज आरोपों पर पुलिस विवेचना के बाद आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।


