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अतिक्रमण हटाओ या गुट बचाओ? देवास में सांसद-विधायक की खींचतान के बीच उलझी नगर निगम की मुहिम

पहले हिंदू दुकानदारों ने लगाया भेदभाव का आरोप, अगले दिन मुस्लिम दुकानदार उतरे विरोध में; सवाल—नगर निगम नियम से चलेगा या राजनीतिक दबाव से?

देवास। शहर में अतिक्रमण हटाने निकली नगर निगम की टीम शायद यह सोचकर निकली थी कि सड़कों और बाजारों को व्यवस्थित करना है, लेकिन दो दिन की कार्रवाई के बाद पूरी मुहिम भाजपा की अंदरूनी गुटबाजी और हिंदू-मुस्लिम आरोपों के दलदल में फंसती दिखाई दे रही है। स्थिति ऐसी बन गई है कि अतिक्रमण कम हट रहा है और राजनीतिक आरोपों का मलबा ज्यादा जमा हो रहा है।

पिछले दिनों नगर निगम ने शुक्रवारिया हाट और आसपास के क्षेत्र में अस्थायी अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की थी। नीचे बैठकर सामान बेचने वाले छोटे व्यापारियों और ठेला संचालकों को वहां से हटाया गया। कार्रवाई के दौरान कुछ दुकानदारों ने आरोप लगाया कि नगर निगम केवल हिंदू समाज के व्यापारियों को निशाना बना रहा है, जबकि मुस्लिम दुकानदारों को रियायत दी जा रही है।

कुछ लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि कार्रवाई देवास विधायक गायत्री राजे पवार के कहने पर की गई। हालांकि यह आरोप संबंधित लोगों द्वारा मौके पर लगाए गए और इसकी स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। कार्रवाई के बाद सांसद महेंद्र सिंह सोलंकी के समर्थक माने जाने वाले कुछ लोग भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने लाइव वीडियो बनाकर नगर निगम की कार्रवाई को एकतरफा बताते हुए सवाल खड़े किए।

राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि शुक्रवारिया हाट और आसपास के क्षेत्र में सांसद समर्थक कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं का प्रभाव है। ऐसे में नगर निगम की कार्रवाई को प्रशासनिक कम और राजनीतिक चश्मे से ज्यादा देखा जाने लगा। सवाल यह उठता है कि क्या नगर निगम की टीम अतिक्रमण हटाने गई थी या अनजाने में भाजपा के दो गुटों के शक्ति प्रदर्शन का मैदान तैयार कर आई?

अगले दिन बदला इलाका, लेकिन आरोप नहीं बदले

पहले दिन हिंदू दुकानदारों द्वारा भेदभाव के आरोप लगाए जाने के बाद अगले दिन नगर निगम ने मुस्लिम बहुल क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी। यहां भी निगम कर्मचारियों को विरोध का सामना करना पड़ा।

कुछ मुस्लिम दुकानदारों ने आरोप लगाया कि पहले दिन लगाए गए आरोपों के दबाव में अब नगर निगम उन्हें निशाना बना रहा है। उनका कहना था कि पिछली कार्रवाई के जवाब में मुस्लिम क्षेत्र में कार्रवाई की जा रही है। यानी पहले दिन नगर निगम पर मुसलमानों को बचाने का आरोप लगा और अगले ही दिन मुसलमानों को निशाना बनाने का।

नगर निगम की स्थिति अब उस विद्यार्थी जैसी नजर आ रही है, जो एक सवाल का जवाब ठीक करने के चक्कर में अगला सवाल भी गलत कर बैठता है। कार्रवाई कहीं भी हो, आरोप तय हैं—एक पक्ष कहेगा हमें निशाना बनाया और दूसरा कहेगा उन्हें बचाया गया।

नियम एक होना चाहिए, कार्रवाई भी समान हो

अतिक्रमण चाहे हिंदू दुकानदार का हो या मुस्लिम दुकानदार का, भाजपा समर्थक का हो या कांग्रेस समर्थक का—नगर निगम के लिए उसका केवल एक परिचय होना चाहिए कि वह अवैध है या वैध। प्रशासन यदि धर्म, राजनीतिक पहुंच अथवा नेताओं के समर्थक-विरोधी के आधार पर कार्रवाई करता हुआ दिखाई देगा, तो उसकी निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

समस्या केवल यह नहीं है कि दुकानदारों ने अलग-अलग आरोप लगाए। बड़ी समस्या यह है कि नगर निगम अपनी कार्रवाई को इतना पारदर्शी और व्यवस्थित नहीं बना पाया कि ऐसे आरोपों की गुंजाइश ही समाप्त हो जाए। यदि पूरे क्षेत्र का पूर्व सर्वेक्षण हो, लिखित नोटिस दिए जाएं, कार्रवाई की तारीख सार्वजनिक की जाए और सभी अतिक्रमणों पर समान नियम लागू हों, तो किसी नेता के समर्थकों को मौके पर पहुंचकर राजनीतिक वीडियो बनाने का अवसर भी नहीं मिलेगा।

सांसद-विधायक के बीच राजनीतिक दूरी की चर्चाएं

देवास की राजनीति में सांसद महेंद्र सिंह सोलंकी और विधायक गायत्री राजे पवार के समर्थकों के बीच राजनीतिक खींचतान की चर्चाएं नई नहीं हैं। सांसद सोलंकी की छवि प्रखर हिंदुत्ववादी नेता के रूप में प्रस्तुत की जाती रही है। दूसरी ओर विधायक गायत्री राजे पवार के समर्थक वर्ग में बड़ी संख्या में मुस्लिम मतदाता और नेता भी बताए जाते हैं।

पिछले विधानसभा चुनाव के बाद राजनीतिक चर्चाओं में यह दावा किया गया था कि मुस्लिम मतदाताओं के समर्थन ने विधायक गायत्री राजे पवार की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हालांकि चुनाव परिणामों को किसी एक समुदाय के वोटों से जोड़कर देखना एक राजनीतिक आकलन हो सकता है, प्रमाणित तथ्य नहीं। इसके बावजूद स्थानीय राजनीति में इसी आधार पर दोनों नेताओं के समर्थकों के बीच अलग-अलग राजनीतिक ध्रुव तैयार होते दिखाई देते हैं।

इस गुटबाजी का असर अब पार्टी के कार्यक्रमों और नियुक्तियों से आगे बढ़कर नगर निगम जैसी प्रशासनिक संस्थाओं की कार्रवाई पर भी दिखाई देने लगा है। कभी किसी कार्रवाई को विधायक समर्थकों के इशारे पर बताया जाता है, तो कभी सांसद समर्थक मौके पर पहुंचकर मोर्चा संभाल लेते हैं। भाजपा भले ही सार्वजनिक मंचों पर एकजुटता का दावा करे, लेकिन जमीन पर कार्यकर्ता कई बार यह तय करने में ज्यादा व्यस्त दिखाई देते हैं कि कार्रवाई सही है या गलत नहीं, बल्कि यह किस गुट के फायदे या नुकसान में है।

राजनीतिक लड़ाई में पिस रहा छोटा व्यापारी

इस पूरे विवाद में सबसे अधिक नुकसान उन छोटे व्यापारियों का हो रहा है, जो फुटपाथ, सड़क किनारे या ठेलों पर सामान बेचकर परिवार चलाते हैं। शहर को अतिक्रमण मुक्त रखना जरूरी है, लेकिन कार्रवाई मानवीय, योजनाबद्ध और समान होनी चाहिए।

यदि बड़े स्थायी अतिक्रमण छोड़ दिए जाएं और कार्रवाई केवल छोटे दुकानदारों तक सीमित रहे, तो यह स्वाभाविक रूप से सवाल खड़े करेगी। नगर निगम को यह स्पष्ट करना होगा कि उसकी सूची में केवल ठेले और जमीन पर बैठने वाले दुकानदार हैं या प्रभावशाली लोगों द्वारा किए गए स्थायी निर्माण भी हैं।

ऐसा न हो कि नगर निगम की जेसीबी छोटे दुकानदारों के सामने तो पूरे जोश से चले, लेकिन किसी रसूखदार के अतिक्रमण के सामने पहुंचते ही उसका डीजल खत्म हो जाए।

क्या गुटबाजी शहर पर भारी पड़ने लगी है?

देवास में सांसद और विधायक के समर्थकों के बीच राजनीतिक प्रतिस्पर्धा यदि स्वस्थ विकास की हो, तो इससे शहर को लाभ मिल सकता है। दोनों नेता अधिक सड़कें, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं, रोजगार, स्वच्छता और आधारभूत सुविधाएं दिलाने की प्रतिस्पर्धा करें तो जनता उनका स्वागत करेगी।

लेकिन यदि प्रतिस्पर्धा इस बात की होने लगे कि किस क्षेत्र में किसका प्रभाव है, किस अधिकारी ने किसके कहने पर कार्रवाई की और किस समुदाय को किस नेता का समर्थक माना जाए, तो इसका नुकसान पूरे शहर को उठाना पड़ेगा।

नगर निगम को किसी सांसद, विधायक अथवा उनके समर्थक गुट का विस्तार बनने के बजाय स्वतंत्र प्रशासनिक संस्था की तरह कार्य करना होगा। अतिक्रमण हटाने के स्पष्ट नियम तय किए जाएं, क्षेत्रवार सार्वजनिक कार्ययोजना बने और हर समुदाय व राजनीतिक प्रभाव वाले व्यक्ति पर समान रूप से कार्रवाई हो।

वरना देवास में आने वाले दिनों में अतिक्रमण हटने से पहले यह पूछना जरूरी हो जाएगा कि दुकान सड़क पर कितनी बाहर है और दुकानदार किस नेता के कितने भीतर है।

सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या भाजपा के दोनों गुटों की लड़ाई अब शहर के प्रशासन और विकास पर भारी पड़ने लगी है? और यदि हां, तो देवास की जनता कब तक राजनीतिक वर्चस्व की इस लड़ाई का नुकसान उठाती रहेगी?

सौरभ सचान

सौरभ सचान देवास लाइव (dewaslive.com) के संपादक एवं प्रमुख हैं। देवास लाइव मध्यप्रदेश के देवास जिले से प्रकाशित एक प्रमुख डिजिटल हिंदी न्यूज़ प्लेटफ़ॉर्म है, जो स्थानीय खबरों, सामाजिक मुद्दों और जनहित से जुड़ी घटनाओं को निष्पक्ष और सटीक रूप में प्रस्तुत करता है। सौरभ सचान की पत्रकारिता का उद्देश्य स्थानीय आवाज़ों को सामने लाना और देवास की जमीनी सच्चाई को जनता तक पहुँचाना है।

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