
संभागायुक्त आशीष सिंह और कलेक्टर ऋतुराज सिंह पहुंचे हवनखेड़ी; पानी की नियमित सैंपलिंग और उद्योगों के ईटीपी की औचक जांच के निर्देश
देवास। सिंहस्थ की तैयारियों के बीच क्षिप्रा नदी को प्रदूषण से बचाने के लिए देवास से पहुंचने वाले दूषित पानी पर प्रशासन का ध्यान केंद्रित हुआ है। औद्योगिक क्षेत्र से होकर क्षिप्रा तक जाने वाले नागधम्मन नाले को लेकर अब निगरानी और जांच सख्त करने की तैयारी है। इसी क्रम में उज्जैन संभागायुक्त आशीष सिंह और देवास कलेक्टर ऋतुराज सिंह ने 6 अक्टूबर को नाले का संयुक्त निरीक्षण किया।
दोनों अधिकारियों ने ग्राम हवनखेड़ी पहुंचकर नाले की वर्तमान स्थिति और जल प्रवाह का जायजा लिया। संभागायुक्त ने स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी औद्योगिक इकाई का बिना उपचारित दूषित रासायनिक पानी या अपशिष्ट सीधे नाले में नहीं छोड़ा जाना चाहिए। उल्लंघन मिलने पर संबंधित उद्योग के विरुद्ध प्रदूषण नियंत्रण संबंधी प्रावधानों के तहत कठोर कार्रवाई की जाए।
अलग-अलग स्थानों से लिए जाएंगे पानी के सैंपल
संभागायुक्त ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों को नाले के विभिन्न स्थानों से समय-समय पर पानी के सैंपल लेने के निर्देश दिए। इनकी नियमित प्रयोगशाला जांच कराकर पानी की गुणवत्ता और प्रदूषण के स्तर की निगरानी की जाएगी।
इस जांच से नाले में बह रहे पानी की स्थिति का आकलन करने और प्रदूषण रोकने के लिए आवश्यक कदम तय करने में मदद मिलेगी।
उद्योगों के ईटीपी की होगी औचक जांच
क्षेत्र की औद्योगिक इकाइयों में स्थापित एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट यानी ईटीपी के संचालन की विशेष और औचक जांच करने के निर्देश भी दिए गए हैं। जांच में देखा जाएगा कि औद्योगिक अपशिष्ट जल का उपचार करने वाले ये संयंत्र सुचारू रूप से चल रहे हैं या नहीं।
संभागायुक्त ने अधिकारियों को सुनिश्चित करने के लिए कहा कि उद्योग दूषित पानी का समुचित उपचार करें और नियमों का उल्लंघन कर उसे नाले में न बहाएं।
एमपीआईडीसी और संबंधित विभाग करेंगे निगरानी
कलेक्टर ऋतुराज सिंह ने एमपीआईडीसी तथा संबंधित विभागों को नाले के समीप स्थित उद्योगों की लगातार मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के मानकों का कड़ाई से पालन कराने पर जोर दिया।
सिंहस्थ के संदर्भ में यह निरीक्षण महत्वपूर्ण है, क्योंकि क्षिप्रा की स्वच्छता के लिए उसमें मिलने वाले नालों के प्रदूषण को नियंत्रित करना जरूरी है। अब प्रशासनिक निर्देशों के बाद नियमित जांच, निगरानी और उल्लंघन मिलने पर कार्रवाई के क्रियान्वयन पर नजर रहेगी।

