देवास

जनसुविधा पर निजी हित भारी? ‘सुगम परिवहन सेवा’ के विरोध में 8 अगस्त से बसें बंद करने की चेतावनी

निजी बस संचालकों ने किराया 2.50 रुपये प्रति किलोमीटर करने सहित रखीं सात मांगें; सवाल—सरकार की व्यवस्थित परिवहन सेवा से आपत्ति क्यों?

देवास लाइव। मध्यप्रदेश में यात्रियों को सुरक्षित, नियमित और जवाबदेह सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध कराने के लिए प्रस्तावित ‘मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा’ के विरोध में निजी बस संचालक लामबंद हो गए हैं। प्राइम रूट बस ऑपरेटर एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि उसकी मांगें 7 अगस्त तक स्वीकार नहीं की गईं तो 8 अगस्त 2026 से इंदौर संभाग सहित पूरे प्रदेश में निजी यात्री बसों का संचालन अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिया जाएगा।

एसोसिएशन ने 3 अगस्त को मुख्यमंत्री, परिवहन मंत्री, परिवहन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और जिला प्रशासन के नाम ज्ञापन सौंपा। पहली नजर में यह ज्ञापन बस संचालकों की व्यावसायिक समस्याओं से जुड़ा दिखाई देता है, लेकिन इसकी टाइमिंग ने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—जब सरकार वर्षों बाद सार्वजनिक परिवहन को व्यवस्थित करने और आम यात्रियों को बेहतर विकल्प देने की तैयारी कर रही है, तभी निजी संचालकों को अपना कारोबार संकट में क्यों दिखाई देने लगा?

वर्षों से निजी ऑपरेटरों के भरोसे यात्री, शिकायतों पर जवाबदेही तय नहीं

वर्ष 2005 में मध्यप्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम बंद होने के बाद प्रदेश की यात्री परिवहन व्यवस्था लगभग पूरी तरह निजी बस संचालकों के हाथों में चली गई। ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों तक सेवाएं पहुंचाने में निजी बसों की भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन इसी दौरान मनमाना किराया, ओवरलोडिंग, निर्धारित स्थान के बजाय कहीं भी बस रोकना, समय-सारणी का पालन नहीं करना, तेज रफ्तार, खराब फिटनेस और यात्रियों से दुर्व्यवहार जैसी शिकायतें भी लगातार सामने आती रही हैं।

प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं में हजारों लोगों की जान गई है। विधानसभा में प्रस्तुत सरकारी आंकड़ों के अनुसार जनवरी 2025 से जुलाई 2026 के बीच मध्यप्रदेश में 90 हजार से अधिक सड़क दुर्घटनाओं में 25 हजार से ज्यादा लोगों की मृत्यु हुई। हालांकि इन सभी मौतों के लिए निजी बसों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता, लेकिन यात्री वाहनों की फिटनेस, चालकों की जवाबदेही, गति नियंत्रण और परमिट व्यवस्था पर कड़ी निगरानी की आवश्यकता से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

ऐसे में सवाल यह है कि बस संचालकों ने सुरक्षा और सेवा सुधार के लिए कभी प्रदेशव्यापी आंदोलन क्यों नहीं किया? यात्रियों की परेशानी, दुर्घटनाओं और अव्यवस्था पर चक्का जाम की चेतावनी क्यों नहीं दी गई? अब जब सरकार एक निगरानी-आधारित परिवहन व्यवस्था लाने जा रही है, तब अनिश्चितकालीन हड़ताल का दबाव बनाना सीधे तौर पर निजी व्यावसायिक हितों की लड़ाई दिखाई देता है।

क्या है मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा?

प्रदेश सरकार ‘मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा’ के माध्यम से शहरों के साथ ग्रामीण, जनजातीय और दूरस्थ क्षेत्रों को नियमित यात्री बस सेवा से जोड़ने की तैयारी कर रही है। योजना के अंतर्गत राज्य स्तर पर मध्यप्रदेश यात्री परिवहन एवं अधोसंरचना लिमिटेड तथा सात संभागीय सहायक कंपनियों के माध्यम से बस संचालन और निगरानी की व्यवस्था प्रस्तावित है।

इस व्यवस्था का उद्देश्य केवल बसें चलाना नहीं, बल्कि रूट, समय-सारणी, परमिट, किराया और सेवा की निगरानी को संस्थागत बनाना है। इंदौर संभाग में पहले चरण के लिए 40 इंटरसिटी मार्ग प्रस्तावित किए गए हैं। यात्रियों के लिए इसका अर्थ नियमित सेवा, तय किराया, बेहतर कनेक्टिविटी और शिकायत होने पर जवाबदेही तय होने की संभावना है।

यदि नई व्यवस्था में पारदर्शी टेंडर, निर्धारित मानक और नियमित निगरानी लागू होती है तो निजी संचालकों के एकाधिकार तथा मनमाने संचालन पर अंकुश लग सकता है। संभवतः विरोध की सबसे बड़ी वजह भी यही है।

किराया बढ़ाने और पुरानी बसों को चलते रहने देने की मांग

एसोसिएशन जिलाध्यक्ष वीरेन्द्र सिंह बैस के अनुसार नई परिवहन नीति और मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा से निजी बस संचालकों के व्यवसाय पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। संगठन ने ज्ञापन में सात मांगें रखी हैं—

  1. इंदौर संभाग के 40 मार्गों का प्रस्तावित राष्ट्रीयकरण निरस्त किया जाए।
  2. कंपनी आधारित परमिट और टेंडर व्यवस्था समाप्त की जाए।
  3. बस किराया बढ़ाकर 2.50 रुपये प्रति किलोमीटर किया जाए।
  4. नई बसों के पंजीयन निरस्त करने संबंधी नोटिस वापस लिए जाएं।
  5. अंतरराज्यीय बसों के स्थायी और अस्थायी परमिट जारी किए जाएं।
  6. फिटनेस प्राप्त 15 वर्ष से अधिक पुराने यात्री वाहनों के परमिट जारी रखे जाएं।
  7. परिवहन कार्यालयों में अधिकारियों और कर्मचारियों की समय पर उपस्थिति सुनिश्चित की जाए।

इनमें परिवहन कार्यालयों की कार्यप्रणाली सुधारने और परमिट संबंधी लंबित मामलों के समाधान जैसी मांगें विचार योग्य हो सकती हैं। लेकिन किराया बढ़ाने, 15 वर्ष से अधिक पुराने वाहनों को चलाते रहने तथा व्यवस्थित कंपनी-आधारित व्यवस्था समाप्त करने की मांगों का मूल्यांकन यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा को प्राथमिकता देकर होना चाहिए।

हड़ताल से सबसे अधिक नुकसान आम यात्रियों का

निजी बस संचालकों ने कहा है कि हड़ताल से यात्रियों को होने वाली असुविधा के लिए परिवहन विभाग जिम्मेदार होगा। यह तर्क अपने आप में सवालों के घेरे में है। बसें बंद करने का निर्णय संचालक संगठन ले रहा है, लेकिन उसकी जिम्मेदारी सरकार पर डालने का प्रयास किया जा रहा है। हड़ताल होने पर सबसे अधिक परेशानी विद्यार्थियों, नौकरीपेशा लोगों, मजदूरों, मरीजों, महिलाओं और ग्रामीण यात्रियों को होगी, जिनके पास परिवहन का कोई दूसरा साधन नहीं है।

लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी संगठन को अपनी बात रखने और आंदोलन करने का अधिकार है, लेकिन आवश्यक सार्वजनिक सेवा को अनिश्चितकाल तक बंद करने की धमकी को जनहित की कसौटी पर भी परखा जाना चाहिए। यात्रियों को बंधक बनाकर व्यावसायिक मांगें मनवाने की प्रवृत्ति स्वीकार्य नहीं हो सकती।

सरकार संवाद करे, लेकिन यात्री हितों से समझौता न हो

सरकार को बस संचालकों की वास्तविक समस्याओं पर चर्चा करनी चाहिए और नीति में मौजूद व्यावहारिक कमियों को दूर करना चाहिए। साथ ही उसे यह भी सुनिश्चित करना होगा कि किसी दबाव में यात्रियों को सुरक्षित, नियमित और किफायती परिवहन देने की योजना कमजोर न पड़े।

मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा सफल होती है या नहीं, यह उसके क्रियान्वयन, पारदर्शिता और निगरानी पर निर्भर करेगा। लेकिन केवल इसलिए इसका विरोध उचित नहीं ठहराया जा सकता कि इससे वर्षों से चले आ रहे निजी परिवहन के एकाधिकार और मनमाने संचालन पर नियंत्रण स्थापित हो सकता है।

ज्ञापन सौंपे जाने के दौरान महेंद्र व्यास, धर्मेंद्र व्यास, बंटी दरबार, धर्मेंद्र चौहान, अयाज खान, गुलजार भाई, अफसर भाई, मोहन राजपूत और शुभम सिंह सहित संगठन के अनेक सदस्य उपस्थित थे।

सौरभ सचान

सौरभ सचान देवास लाइव (dewaslive.com) के संपादक एवं प्रमुख हैं। देवास लाइव मध्यप्रदेश के देवास जिले से प्रकाशित एक प्रमुख डिजिटल हिंदी न्यूज़ प्लेटफ़ॉर्म है, जो स्थानीय खबरों, सामाजिक मुद्दों और जनहित से जुड़ी घटनाओं को निष्पक्ष और सटीक रूप में प्रस्तुत करता है। सौरभ सचान की पत्रकारिता का उद्देश्य स्थानीय आवाज़ों को सामने लाना और देवास की जमीनी सच्चाई को जनता तक पहुँचाना है।

Related Articles

Back to top button