
न्यू स्वदेशी स्वीट्स की दुकान और जोधपुर स्वीट्स का गोदाम सील; करीब 600 किलो तैयार मिठाइयां भी मिलीं, गुजरात से हो रही थी मावे की आपूर्ति
देवास। त्योहारों से पहले देवास में मिठाइयों की गुणवत्ता को लेकर चौंकाने वाला मामला सामने आया है। बुधवार रात प्रशासन और खाद्य सुरक्षा विभाग की संयुक्त टीम ने नयापुरा स्थित न्यू स्वदेशी स्वीट्स तथा भोपाल चौराहा स्थित जोधपुर स्वीट्स पर छापा मारा। दोनों स्थानों से कुल 124 किलो एनालॉग मावा मिला, जबकि करीब 820 किलो मावे के खाली बैग भी पाए गए। कार्रवाई के बाद दोनों प्रतिष्ठानों के संबंधित परिसरों को सील कर दिया गया।
नायब तहसीलदार कपिल गुज्जर और खाद्य सुरक्षा अधिकारी सुरेंद्र ठाकुर के नेतृत्व में की गई कार्रवाई रात करीब 11 बजे तक चली। जांच के दौरान एनालॉग मावे से तैयार की जा रही और पहले से बनाकर रखी गई बड़ी मात्रा में मिठाइयां भी मिलीं।
न्यू स्वदेशी स्वीट्स पर मिला 52 किलो मावा
प्रशासन और खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम सबसे पहले नयापुरा स्थित न्यू स्वदेशी स्वीट्स पहुंची। यह प्रतिष्ठान अंकुर गुप्ता का बताया गया है। जांच के दौरान यहां 220 किलो एनालॉग मावे के खाली बैग और 52 किलो एनालॉग मावा मिला।
टीम के अनुसार मौके पर इसी मावे का उपयोग कर मिठाइयां तैयार की जा रही थीं। अधिकारियों ने मावा, खाली बैग और संबंधित सामग्री को कब्जे में लेकर दुकान को सील कर दिया। मावे और तैयार मिठाइयों के नमूने भी जांच के लिए लिए गए हैं।
जोधपुर स्वीट्स के गोदाम में 72 किलो भरा मावा
नयापुरा में कार्रवाई के बाद टीम भोपाल चौराहा स्थित जोधपुर स्वीट्स के गोदाम पहुंची। यहां 600 किलो एनालॉग मावे के खाली बैग और 72 किलो एनालॉग मावे के भरे हुए बैग मिले।
गोदाम में करीब 600 किलो तैयार मिठाइयों का भंडारण भी पाया गया। टीम ने मिठाइयों, मावे और खाली बैगों को गोदाम के अंदर रखवाकर परिसर को सील कर दिया। यहां कार्रवाई रात करीब 11 बजे तक जारी रही।
इस तरह दोनों स्थानों से कुल 124 किलो एनालॉग मावा मिला। वहीं, 820 किलो मावे के खाली बैग मिलने से इसके पहले ही बड़ी मात्रा में मावा खपाए जाने की आशंका सामने आ रही है।
गुजरात की कंपनी से आ रहा था मावा
कार्रवाई के दौरान प्रशासन ने प्रतिष्ठान संचालकों से एनालॉग मावे की आपूर्ति के संबंध में पूछताछ की। प्रारंभिक जानकारी में सामने आया कि गुजरात की किसी कंपनी से देवास में मावे की आपूर्ति की जा रही थी। हालांकि कंपनी का नाम और सप्लाई से जुड़े अन्य विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
अब प्रशासन को यह पता लगाना होगा कि मावा किस कंपनी से खरीदा गया, कितनी बार देवास पहुंचा, इसके बिल और परिवहन संबंधी दस्तावेज उपलब्ध हैं या नहीं तथा शहर के अन्य किन प्रतिष्ठानों तक इसकी आपूर्ति की गई।
खाली बैग बता रहे हैं—मामला सिर्फ 124 किलो का नहीं
दोनों स्थानों से मिले 820 किलो मावे के खाली बैग इस कार्रवाई को और गंभीर बनाते हैं। खाली बैगों से संकेत मिलता है कि इससे पहले भी बड़ी मात्रा में एनालॉग मावा मिठाइयां बनाने में इस्तेमाल किया गया हो सकता है।
जोधपुर स्वीट्स के गोदाम में करीब 600 किलो तैयार मिठाइयां मिलने और न्यू स्वदेशी स्वीट्स में मौके पर मिठाई बनाने का काम चलते मिलने से सवाल उठ रहा है कि इस मावे से तैयार कितनी मिठाइयां बाजार में बेची जा चुकी हैं। मावे और मिठाइयों की वास्तविक गुणवत्ता प्रयोगशाला की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगी।
त्योहार पर ही क्यों खुलती है खाद्य विभाग की नींद?
कार्रवाई जरूरी है, लेकिन इसके साथ खाद्य सुरक्षा विभाग की नियमित निगरानी भी सवालों के घेरे में है। यदि इतनी बड़ी मात्रा में एनालॉग मावा गुजरात से देवास आकर प्रतिष्ठानों में खपाया जा रहा था तो विभाग को इसकी जानकारी पहले क्यों नहीं मिली?
शहर में मिठाइयों और खाद्य पदार्थों की जांच का अभियान अक्सर त्योहारों के आसपास ही तेज होता दिखाई देता है। क्या बाकी महीनों में प्रतिष्ठानों के स्टॉक, खरीद बिल, आपूर्तिकर्ताओं और मिठाई बनाने में उपयोग होने वाली सामग्री की नियमित जांच नहीं होती? यदि निरीक्षण किए जाते हैं तो इतनी बड़ी मात्रा में एनालॉग मावा कैसे खपता रहा?
अधिकारियों ने मावे और मिठाइयों के नमूने प्रयोगशाला भेजने तथा रिपोर्ट के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई करने की बात कही है। अब जांच को दोनों प्रतिष्ठानों तक सीमित रखने के बजाय गुजरात से देवास तक फैली मावे की पूरी आपूर्ति शृंखला तक पहुंचाना जरूरी है।


