पीथमपुर का कचरा देवास में ? रसूलपुर क्षेत्र में दो गोदाम सील, केमिकल से भरे ड्रम और मेडिकल कचरा मिलने से उठे सवाल

ड्रमों में कौन सा केमिकल था और उससे कितना खतरा हो सकता था? कचरे के स्रोत, भंडारण की अनुमति और प्रदूषण विभाग की निगरानी की जांच जरूरी
देवास। रसूलपुर क्षेत्र में बिना अनुमति मेडिकल कचरा, केमिकल और फैक्टरियों से निकलने वाला कचरा जमा करने के मामले में नगर निगम की टीम ने शनिवार को दो गोदाम सील किए। कार्रवाई के दौरान मेडिकल वेस्ट और केमिकल जब्त किए गए। मौके पर केमिकल से भरे ड्रम भी रखे मिले। कलेक्टर ऋतुराज सिंह और निगम आयुक्त दलीप कुमार के निर्देश पर हुई इस कार्रवाई के बाद अब कचरे के स्रोत और उसके निस्तारण के तरीके को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
एक गोदाम में मेडिकल कचरा और केमिकल, दूसरे में कचरा जलाने की बात
निगम से मिली जानकारी के अनुसार, टीम ने पहले एक संदिग्ध गोदाम की जांच की। यहां गोदाम के अंदर और आसपास बड़ी मात्रा में मेडिकल कचरा, केमिकल और अन्य अपशिष्ट जमा मिला। टीम ने मौके पर पंचनामा बनाकर गोदाम सील कर दिया।
इसके बाद गोलू खान के गोदाम पर कार्रवाई की गई। निगम के मुताबिक, यहां औद्योगिक क्षेत्रों से निकलने वाला कचरा लाकर बिना अनुमति जमा किया जा रहा था। कचरा जलाए जाने की बात भी सामने आई। टीम ने इस गोदाम को भी पंचनामा बनाकर सील किया।
जांच में यह जानकारी भी सामने आई कि जिस जमीन पर ये गोदाम मिले, वह फैक्टरी लगाने के लिए लीज पर ली गई थी। ऐसे में सवाल है कि वहां कचरा जमा करने का काम किस अनुमति के आधार पर चल रहा था?
ट्रैफिक व्यवस्था देखने पहुंचे अधिकारियों की पड़ी नजर
बताया जा रहा है कि कार्रवाई से एक दिन पहले प्रशासनिक अधिकारी रसूलपुर क्षेत्र के ब्रिज और आसपास की सड़कों पर ट्रैफिक व्यवस्था का निरीक्षण करने पहुंचे थे। इसी दौरान उनकी नजर कचरे के इस भंडारण पर पड़ी। इसके बाद नगर निगम की टीम ने जांच और छापामार कार्रवाई की।
शहर के नजदीक और सड़क किनारे इतने बड़े पैमाने पर कचरा जमा होना निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। यह काम कब से चल रहा था और संबंधित विभागों को इसकी जानकारी थी या नहीं, इसकी जांच होनी चाहिए।
केमिकल के ड्रमों में क्या था, यह सबसे बड़ा सवाल
मौके पर रखे ड्रमों में कौन सा केमिकल था, उसकी मात्रा कितनी थी और उसे रखने के लिए क्या सुरक्षा व्यवस्था की गई थी—इन बातों की स्पष्ट जानकारी सामने आना जरूरी है।
अगर आग लगती या ड्रमों से केमिकल रिसता, तो आसपास के लोगों और सड़क से गुजरने वालों पर क्या असर पड़ सकता था? क्या वहां आग बुझाने और किसी आपात स्थिति से निपटने के इंतजाम थे?
ड्रमों में मौजूद केमिकल की पहचान और विशेषज्ञ जांच के बिना यह तय नहीं किया जा सकता कि उससे कितना खतरा था। इसलिए ड्रमों की सूची, उन पर लगे लेबल, संबंधित दस्तावेज और जरूरत के अनुसार सैंपल की जांच इस मामले की अहम कड़ी होंगे।
पीथमपुर से कचरा लाए जाने के आरोप
सूत्रों का दावा है कि कार्रवाई की जद में आया एक गोदाम सत्यमित्र सेल्स कंपनी से संबंधित है। सूत्रों के अनुसार, कंपनी से जुड़े संचालकों की पीथमपुर में खतरनाक औद्योगिक कचरे के निस्तारण से जुड़ी एक यूनिट थी। दावा किया जा रहा है कि अप्रैल में इस यूनिट में आग लगने के बाद कचरा देवास लाया जाने लगा।
आरोप है कि विभिन्न औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले कचरे को नियमानुसार सीमेंट प्लांट में निस्तारण के लिए भेजने के बजाय रसूलपुर क्षेत्र में जमा किया जा रहा था। मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में पहले भी शिकायतें किए जाने की बात कही जा रही है।
कंपनी से संबंध, पीथमपुर की यूनिट में आग, कचरा देवास लाए जाने और पूर्व शिकायतों से जुड़े इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित दस्तावेजों और पक्षों के जवाब से ही स्थिति स्पष्ट होगी।
गोदाम सील करने के साथ पूरी जांच भी जरूरी
नगर निगम के मुख्य स्वच्छता निरीक्षक रवि गोयनार ने बताया कि कलेक्टर और निगम आयुक्त के निर्देश पर कार्रवाई की गई है। उन्होंने कहा कि अवैध रूप से मेडिकल वेस्ट और औद्योगिक कचरा जमा करने वाले गोदाम संचालकों के खिलाफ नियमानुसार आगे कार्रवाई की जाएगी। कार्रवाई में स्वच्छता निरीक्षक शंकर सांगते, वार्ड दरोगा और निगम की टीम शामिल रही।
अब जरूरी है कि कचरा भेजने वाली इकाइयों, उसे लाने वाले वाहनों, गोदाम संचालकों की अनुमति और कचरे के अंतिम निस्तारण का रिकॉर्ड जांचा जाए। यदि पहले शिकायतें हुई थीं, तो उन पर क्या कार्रवाई की गई, यह भी सामने आना चाहिए। गोदाम सील करने की कार्रवाई के साथ वहां मौजूद कचरे और केमिकल को सुरक्षित तरीके से हटाने और निस्तारण की व्यवस्था भी जरूरी है।



