
किसान से मांगे थे 20 हजार रुपये, 11 हजार लेने के बाद शेष रकम के लिए बना रहा था दबाव; विशेष न्यायालय ने कुल 20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया
देवास। जमीन के सीमांकन और राजस्व रिकॉर्ड से जुड़े कामों के लिए किसानों से रिश्वत मांगने वाले कर्मचारियों के खिलाफ देवास की विशेष अदालत ने कड़ा संदेश दिया है। किसान से 20 हजार रुपये की रिश्वत मांगने वाले तत्कालीन राजस्व निरीक्षक राजेंद्र धुर्वे को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत 4-4 वर्ष के सश्रम कारावास और कुल 20 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया गया है। भ्रष्टाचार के खिलाफ इस फैसले को बड़ी और सराहनीय कार्रवाई माना जा रहा है।
उपसंचालक अभियोजन जीपी घाटिया ने बताया कि 1 जून 2022 को किसान सत्यनारायण गुर्जर ने लोकायुक्त कार्यालय उज्जैन में पुलिस अधीक्षक लोकायुक्त को लिखित शिकायत दी थी। शिकायत में बताया गया था कि सत्यनारायण और उनके भाई को पारिवारिक बंटवारे में पिता से कृषि भूमि मिली थी। जमीन का नामांतरण हो चुका था, लेकिन सीमांकन होना बाकी था।
नक्शा ठीक करने के नाम पर मांगे 20 हजार रुपये
किसान ने जमीन का सीमांकन कराने के लिए सतवास तहसील कार्यालय में पदस्थ राजस्व निरीक्षक राजेंद्र धुर्वे से संपर्क किया। आरोप था कि राजस्व निरीक्षक ने जमीन का नक्शा गलत बताते हुए उसे दोबारा तैयार करने की बात कही। इसके बदले उसने किसान से 20 हजार रुपये की रिश्वत मांगी।
शिकायत के अनुसार, आरोपी राजस्व निरीक्षक 11 हजार रुपये पहले ही ले चुका था और शेष 9 हजार रुपये देने के लिए किसान पर लगातार दबाव बना रहा था। इससे परेशान होकर सत्यनारायण गुर्जर ने लोकायुक्त कार्यालय में शिकायत की।
लोकायुक्त की जांच में रिश्वत की मांग की पुष्टि
लोकायुक्त उज्जैन ने शिकायत की जांच कराई। जांच में रिश्वत मांगने की पुष्टि होने के बाद भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत एफआईआर दर्ज की गई। विवेचना पूरी होने पर अभियोजन ने विशेष न्यायालय के समक्ष आरोप पत्र प्रस्तुत किया।
मामले की सुनवाई के बाद विशेष न्यायाधीश, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, जिला देवास ने अभियुक्त राजेंद्र धुर्वे, पिता सुजान सिंह धुर्वे, उम्र 42 वर्ष, निवासी ग्राम उगली, तहसील केवलारी, जिला सिवनी को दोषी पाया। न्यायालय ने उसे भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 तथा धारा 13(1)(बी) सहपठित धारा 13(2) में 4-4 वर्ष के सश्रम कारावास और 10-10 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। दोनों धाराओं में मिलाकर कुल 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
किसानों का आर्थिक शोषण करने वालों के लिए कड़ा संदेश
राजस्व विभाग में सीमांकन, नामांतरण, बंटवारा और नक्शा सुधार जैसे कामों के लिए किसानों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। प्रदेशभर से आए दिन ऐसी शिकायतें सामने आती हैं कि कुछ पटवारी और राजस्व निरीक्षक किसानों की मजबूरी का फायदा उठाकर उनसे रिश्वत मांगते हैं। कई किसान काम रुकने या अधिकारियों के चक्कर में फंसने के डर से शिकायत भी नहीं कर पाते।
ऐसे में देवास की विशेष अदालत का यह फैसला भ्रष्ट कर्मचारियों के लिए कड़ा संदेश है। साथ ही यह मामला बताता है कि यदि पीड़ित व्यक्ति हिम्मत करके लोकायुक्त या संबंधित जांच एजेंसी तक शिकायत पहुंचाए और जांच में सहयोग करे, तो रिश्वत मांगने वालों को कानून के दायरे में लाया जा सकता है।
शासन की ओर से मामले में पैरवी सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी ऊदल सिंह मौर्य ने की। कोर्ट मोहर्रिर आरक्षक आर. विष्णु कचनार और लोकायुक्त मुंशी आरक्षक उमेश ने सहयोग किया।



