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देवास भाजपा में ‘गद्दारी’ पर घमासान: विधायक मनोज चौधरी ने प्रदेशाध्यक्ष को भेजा शिकायत पत्र, अंदरखाने कई नामों की चर्चा

Dewas Live | अपनी ही पार्टी के कुछ नेताओं की भूमिका से नाराज बताए जा रहे हाटपिपल्या विधायक; संगठनात्मक नियुक्तियों से पहले पुराने चुनावी हिसाब-किताब की चर्चा तेज

देवास। मध्य प्रदेश भाजपा में संगठनात्मक नियुक्तियों और फेरबदल की सुगबुगाहट के बीच देवास भाजपा की अंदरूनी राजनीति गरमा गई है। हाटपिपल्या विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक मनोज चौधरी ने भाजपा प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को एक शिकायत पत्र भेजा है। बताया जा रहा है कि इस पत्र में पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ कथित रूप से काम करने वाले कुछ नेताओं की भूमिका को लेकर आपत्ति दर्ज कराई गई है।

विधायक मनोज चौधरी शिकायत पत्र भेजे जाने की बात स्वीकार कर रहे हैं, हालांकि पत्र में किन-किन नेताओं के नाम हैं, इसे लेकर वे सार्वजनिक रूप से नाम लेने से परहेज कर रहे हैं। वहीं भाजपा के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक इस पूरे घटनाक्रम के तार देवास भाजयुमो की आगामी संगठनात्मक नियुक्तियों और विशेष रूप से जिलाध्यक्ष पद की दावेदारी से जुड़े बताए जा रहे हैं।

पार्टी के अंदरखाने चल रही चर्चाओं में भाजयुमो प्रदेश कार्यसमिति सदस्य रजत पाल सिंह राजपूत का नाम प्रमुखता से सामने आ रहा है। सूत्रों का दावा है कि उनकी संभावित संगठनात्मक दावेदारी को लेकर विधायक की ओर से आपत्ति जताई गई है। इसके अलावा भाजपा नेता नरेंद्र सिंह राजपूत और तत्कालीन नगर मंडल अध्यक्ष बलवान उदावत के नाम भी अंदरूनी राजनीतिक चर्चाओं में लिए जा रहे हैं।

हालांकि, शिकायत पत्र की पूरी विषयवस्तु और उसमें दर्ज नामों को लेकर विधायक मनोज चौधरी की ओर से सार्वजनिक रूप से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। इसलिए इन नामों को पार्टी के अंदरूनी सूत्रों से सामने आई जानकारी और राजनीतिक चर्चाओं के आधार पर ही देखा जाना चाहिए।

विधानसभा चुनाव की पुरानी अदावत या संगठन की नई लड़ाई?

सूत्रों के अनुसार शिकायत का मूल विषय पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी के प्रति कुछ स्थानीय नेताओं की कथित भूमिका से जुड़ा है। दावा किया जा रहा है कि विधायक की नाराजगी उन नेताओं को लेकर है, जिनके बारे में उनका मानना है कि चुनाव के समय उन्होंने पार्टी प्रत्याशी का साथ देने के बजाय विरोधी खेमे को कथित तौर पर फायदा पहुंचाया।

बताया जा रहा है कि विधायक ने प्रदेश नेतृत्व के सामने यह पक्ष रखा है कि संगठन में महत्वपूर्ण पद और जिम्मेदारी देते समय संबंधित नेताओं के पिछले राजनीतिक आचरण और विधानसभा चुनाव के दौरान उनकी भूमिका को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।

अब यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब देवास में भाजयुमो जिलाध्यक्ष सहित संगठन के विभिन्न पदों को लेकर दावेदार सक्रिय बताए जा रहे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यह मामला वास्तव में पार्टी अनुशासन का है या संगठनात्मक नियुक्तियों की दौड़ ने विधानसभा चुनाव के पुराने हिसाब-किताब को फिर से खोल दिया है।

राजनीति के जानकार भी इस घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। आखिर भाजपा में संगठन का नया अध्याय शुरू होने से पहले पुराने चुनाव की ‘कॉपी’ दोबारा जांची जा रही है। किसने कमल के लिए पसीना बहाया और किस पर दूसरे खेमे को पानी देने का संदेह है—अब शायद नियुक्तियों से पहले इसका भी हिसाब लगाया जा रहा है।

‘गद्दारी’ को लेकर अंदरखाने चर्चा तेज

भाजपा के अंदरूनी सूत्रों की मानें तो विधायक मनोज चौधरी विधानसभा चुनाव के दौरान कुछ नेताओं की भूमिका को लेकर लंबे समय से नाराज बताए जाते हैं। पार्टी के भीतर इस नाराजगी को कथित ‘गद्दारी’ और पार्टी विरोधी गतिविधियों से जोड़कर भी देखा जा रहा है।

हालांकि विधायक ने सार्वजनिक रूप से किसी नेता का नाम लेकर आरोप लगाने से फिलहाल परहेज किया है। यही वजह है कि इस मामले में आधिकारिक बयान और अंदरखाने चल रही राजनीतिक चर्चा के बीच अंतर करना जरूरी है।

सूत्र बताते हैं कि विधायक की मुख्य आपत्ति यह है कि यदि चुनाव के दौरान पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ कथित रूप से काम करने वाले किसी व्यक्ति को बाद में संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलती है, तो इससे उन कार्यकर्ताओं में गलत संदेश जा सकता है जो चुनाव के दौरान पार्टी के साथ मजबूती से खड़े रहे।

भाजयुमो जिलाध्यक्ष की रेस में आया नया मोड़

देवास भाजयुमो जिला अध्यक्ष पद को लेकर इन दिनों कई युवा नेताओं की दावेदारी की चर्चा है। अलग-अलग राजनीतिक खेमों से जुड़े युवा चेहरे संगठन में अपनी जगह बनाने की कोशिश में हैं। इसी बीच विधायक मनोज चौधरी का प्रदेशाध्यक्ष को भेजा गया शिकायत पत्र इस पूरी दौड़ में नया राजनीतिक मोड़ माना जा रहा है।

अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक रजत पाल सिंह राजपूत का नाम भी संभावित दावेदारों की चर्चा में है। सूत्रों का दावा है कि उनकी दावेदारी को लेकर ही विधायक की आपत्ति सामने आई है। हालांकि पार्टी संगठन ने अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है और न ही यह स्पष्ट किया है कि आगामी नियुक्तियों में किन नामों पर विचार किया जा रहा है।

यानी युवा मोर्चा की कुर्सी अभी खाली है, लेकिन उसके आसपास राजनीतिक ‘मोर्चाबंदी’ पूरी दिखाई दे रही है। नियुक्ति का पत्र किसके नाम निकलेगा यह भविष्य बताएगा, मगर उससे पहले शिकायतों की चिट्ठियां भोपाल पहुंचने की चर्चा ने देवास की राजनीति का तापमान जरूर बढ़ा दिया है।

विधायक ने शिकायत की पुष्टि की, नामों पर साधी चुप्पी

इस पूरे मामले को लेकर विधायक मनोज चौधरी से संपर्क किया गया तो उन्होंने प्रदेश नेतृत्व को शिकायत भेजे जाने की बात स्वीकार की। हालांकि शिकायत में किन व्यक्तियों को लेकर आपत्ति दर्ज कराई गई है, इस पर उन्होंने सार्वजनिक रूप से नाम लेने से परहेज किया।

सूत्रों के मुताबिक विधायक का रुख उन लोगों को संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देने के खिलाफ है, जिनकी विधानसभा चुनाव के दौरान भूमिका को लेकर उन्हें आपत्ति रही है।

विधायक का कहना है कि संगठन में पद, प्रतिष्ठा और जिम्मेदारी ऐसे कार्यकर्ताओं को मिलनी चाहिए जो पार्टी के प्रति पूरी तरह समर्पित रहे हों। हालांकि जिन व्यक्तियों को लेकर उन्होंने प्रदेश नेतृत्व के समक्ष अपनी बात रखी है, उनके नाम विधायक ने सार्वजनिक रूप से नहीं बताए।

रजत पाल सिंह राजपूत ने आरोपों को बताया बेबुनियाद

इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम और अंदरखाने चल रही चर्चाओं में अपना नाम सामने आने पर भाजयुमो प्रदेश कार्यसमिति सदस्य रजत पाल सिंह राजपूत ने पार्टी विरोधी गतिविधियों से जुड़े आरोपों को खारिज किया है।

उनका कहना है कि उन्हें ऐसे किसी शिकायत पत्र में अपना नाम होने की आधिकारिक जानकारी नहीं है और न ही पार्टी संगठन की ओर से उनसे इस संबंध में कोई स्पष्टीकरण मांगा गया है।

रजत पाल सिंह राजपूत का कहना है कि विधानसभा चुनाव के दौरान वह सोनकच्छ विधानसभा क्षेत्र में पार्टी की जिम्मेदारी संभाल रहे थे और भाजपा के लिए काम कर रहे थे। उन्होंने अपने खिलाफ चल रही पार्टी विरोधी गतिविधियों की चर्चाओं और आरोपों को राजनीति से प्रेरित और बेबुनियाद बताया है।

अब भोपाल के फैसले पर नजर

फिलहाल देवास भाजपा की इस अंदरूनी खींचतान में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि विधायक मनोज चौधरी ने प्रदेशाध्यक्ष को शिकायत भेजे जाने की पुष्टि की है, लेकिन शिकायत में शामिल नामों को सार्वजनिक नहीं किया है। दूसरी ओर पार्टी के अंदरूनी सूत्रों से कुछ नामों की चर्चा सामने आ रही है, जिन्हें लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।

अब निगाहें भाजपा प्रदेश नेतृत्व पर हैं। देखना होगा कि संगठन इस शिकायत को किस रूप में लेता है और आगामी नियुक्तियों में इसका कोई असर दिखाई देता है या नहीं।

फिलहाल देवास भाजपा में स्थिति कुछ ऐसी है कि जिलाध्यक्ष की कुर्सी का फैसला भोपाल में होना है, लेकिन उसके पहले देवास में ‘कौन वफादार और कौन गद्दार’ की सियासी बहस जरूर शुरू हो गई है। पार्टी बाहर से अनुशासन की चादर ओढ़े दिखाई दे रही है, मगर अंदरखाने पुराने चुनावी हिसाब की डायरी के पन्ने तेजी से पलटे जाने की चर्चा है।

डिस्क्लेमर: विधायक मनोज चौधरी द्वारा प्रदेश भाजपा नेतृत्व को शिकायत भेजे जाने की पुष्टि की गई है, लेकिन शिकायत पत्र में किन व्यक्तियों के नाम अथवा उनके संबंध में क्या आरोप दर्ज हैं, इसकी सार्वजनिक रूप से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। समाचार में रजत पाल सिंह राजपूत, नरेंद्र सिंह राजपूत एवं बलवान उदावत से संबंधित उल्लेख पार्टी के अंदरूनी सूत्रों से प्राप्त जानकारी और राजनीतिक चर्चाओं पर आधारित हैं। रजत पाल सिंह राजपूत ने अपने ऊपर लगाए जा रहे पार्टी विरोधी गतिविधियों से जुड़े आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा है कि विधानसभा चुनाव के दौरान वह सोनकच्छ विधानसभा क्षेत्र में भाजपा के लिए कार्य कर रहे थे।

सौरभ सचान

सौरभ सचान देवास लाइव (dewaslive.com) के संपादक एवं प्रमुख हैं। देवास लाइव मध्यप्रदेश के देवास जिले से प्रकाशित एक प्रमुख डिजिटल हिंदी न्यूज़ प्लेटफ़ॉर्म है, जो स्थानीय खबरों, सामाजिक मुद्दों और जनहित से जुड़ी घटनाओं को निष्पक्ष और सटीक रूप में प्रस्तुत करता है। सौरभ सचान की पत्रकारिता का उद्देश्य स्थानीय आवाज़ों को सामने लाना और देवास की जमीनी सच्चाई को जनता तक पहुँचाना है।

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