
करीब एक दशक से शहर में पदस्थ अधिकारी की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल; प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार मामला मुख्यमंत्री स्तर तक पहुंचा
देवास। शहर के दो मिष्ठान प्रतिष्ठानों पर हुई कार्रवाई में बड़े पैमाने पर प्रतिबंधित एनालॉग मावा, खाली बैग और तैयार मिठाइयां मिलने के बाद खाद्य सुरक्षा अधिकारी सुरेंद्र ठाकुर की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार मामला मुख्यमंत्री स्तर तक पहुंचने के बाद सुरेंद्र ठाकुर को देवास से हटाया जा सकता है।
नयापुरा स्थित न्यू स्वदेशी स्वीट्स और भोपाल चौराहा स्थित जोधपुर स्वीट्स पर हुई कार्रवाई में कुल 124 किलो एनालॉग मावा, 820 किलो मावे के खाली बैग और करीब 600 किलो तैयार मिठाइयां मिली थीं। जब्त मावे को कलेक्टर ऋतुराज सिंह के निर्देश पर ट्रेंचिंग ग्राउंड में गड्ढा खोदकर नष्ट कर दिया गया।
करीब एक दशक से देवास में पदस्थ
खाद्य सुरक्षा अधिकारी सुरेंद्र ठाकुर को देवास में पदस्थ हुए करीब एक दशक का समय हो चुका है। लंबे समय से एक ही शहर में जिम्मेदारी संभालने के कारण उन्हें स्थानीय खाद्य कारोबारियों, मिठाई प्रतिष्ठानों, गोदामों और बाहर से आने वाली खाद्य सामग्री की पूरी जानकारी होना स्वाभाविक है।
खाद्य सुरक्षा अधिकारी की जिम्मेदारी शहर में बिकने वाली खाद्य सामग्री की नियमित जांच, प्रतिष्ठानों का निरीक्षण, संदिग्ध सामग्री के नमूने लेना और अमानक वस्तुओं को बाजार में पहुंचने से रोकना है। इसके बावजूद दो प्रतिष्ठानों से इतनी बड़ी मात्रा में एनालॉग मावा और उससे जुड़ी सामग्री मिलने के बाद विभाग की सालभर की निगरानी पर सवाल उठ रहे हैं।
दो दुकानों में इतना मिला तो पूरे शहर में कितना खपा?
न्यू स्वदेशी स्वीट्स पर 52 किलो एनालॉग मावा और 220 किलो के खाली बैग मिले थे। मौके पर इसी मावे से मिठाइयां तैयार किए जाने की जानकारी सामने आई थी।
जोधपुर स्वीट्स के गोदाम से 72 किलो एनालॉग मावा, 600 किलो के खाली बैग और करीब 600 किलो तैयार मिठाइयां मिली थीं। दोनों स्थानों से कुल 820 किलो मावे के खाली बैग मिलने से स्पष्ट है कि बड़ी मात्रा में सामग्री पहले ही मिठाइयां बनाने में खपाई जा चुकी थी।
अब सवाल उठ रहा है कि जब केवल दो प्रतिष्ठानों की जांच में इतना बड़ा मामला सामने आया है तो पूरे देवास में कितनी मात्रा में एनालॉग मावा और उससे बनी मिठाइयां खपाई जा चुकी होंगी। शहर के अन्य बड़े मिठाई प्रतिष्ठानों और उनके गोदामों की जांच अब तक क्यों नहीं की गई?
त्योहारों पर ही क्यों सक्रिय होता है विभाग?
खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई आमतौर पर त्योहारों के आसपास ही दिखाई देती है। दुकानों से नमूने लिए जाते हैं, नोटिस दिए जाते हैं और कुछ प्रतिष्ठानों पर छापे मारे जाते हैं। त्योहार समाप्त होने के बाद नियमित जांच की गति फिर धीमी पड़ जाती है।
सवाल यह है कि न्यू स्वदेशी स्वीट्स और जोधपुर स्वीट्स के स्टॉक, खरीद बिल और गोदामों की पिछली जांच कब की गई थी। गुजरात से कथित रूप से आ रहे एनालॉग मावे की जानकारी विभाग को पहले क्यों नहीं मिली और इतनी बड़ी मात्रा में खाली बैग जमा होने तक अधिकारी क्या कर रहे थे?
लापरवाही या मिलीभगत?
बड़े पैमाने पर मावा खपाए जाने के बाद अब यह सवाल भी उठ रहा है कि मामला केवल विभागीय लापरवाही का है या संबंधित कारोबारियों और जिम्मेदार अधिकारियों के बीच मिलीभगत से लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ किया जा रहा था।
करीब एक दशक से देवास में पदस्थ अधिकारी की मौजूदगी के बावजूद यदि प्रतिबंधित सामग्री शहर में पहुंचकर मिठाइयों में इस्तेमाल होती रही तो इसकी जिम्मेदारी तय होना आवश्यक है। सुरेंद्र ठाकुर के कार्यकाल में लिए गए नमूनों, किए गए निरीक्षणों, जारी नोटिसों और अमानक पाए गए खाद्य पदार्थों पर हुई कार्रवाई का रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में लिया जा सकता है।
देवास से हटाए जाने की संभावना
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार एनालॉग मावा मामले की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मुख्यमंत्री स्तर तक पहुंच चुकी है। इसके बाद खाद्य सुरक्षा अधिकारी सुरेंद्र ठाकुर को देवास से हटाए जाने की संभावना बन गई है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मिलावट करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। कलेक्टर ऋतुराज सिंह ने भी स्पष्ट किया है कि जिले में मिलावट के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा और लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वालों को छोड़ा नहीं जाएगा।
अब निगाह इस बात पर है कि कार्रवाई केवल मावा नष्ट करने और प्रतिष्ठानों को सील करने तक सीमित रहती है या खाद्य सुरक्षा विभाग की जिम्मेदारी तय करते हुए अधिकारी स्तर पर भी कार्रवाई की जाती है।




