
देवास। लंबे इंतजार के बाद देवास नगर पालिक निगम में एल्डरमैन की नियुक्तियां हो गई हैं, लेकिन इन नियुक्तियों के साथ भाजपा की अंदरूनी राजनीति और गुटीय समीकरण भी चर्चा में आ गए हैं। दिलचस्प यह है कि लंबे समय से एल्डरमैन बनने की आस लगाए बैठे नेताओं और कार्यकर्ताओं को अब मौजूदा नगर निगम परिषद के बचे हुए करीब सात-आठ महीने के कार्यकाल के लिए यह पद मिला है।
देवास नगर निगम के लिए कुल आठ एल्डरमैन नियुक्त किए गए हैं। इनमें राजेश यादव, अर्जुन चौधरी, हरीश देवलिया और प्रिया शर्मा को विधायक गायत्री राजे पवार के समर्थन से पद मिलने की चर्चा है। वहीं सचिन सोनी को नगर निगम सभापति रवि जैन का करीबी माना जाता है। संतोष वर्मा सांसद महेंद्र सिंह सोलंकी के करीबी बताए जाते हैं, जबकि दिनेश सांखला भाजपा जिलाध्यक्ष राय सिंह सेंधव के करीबी माने जाते हैं।
आठवां नाम चेतन योगी का है, जो पत्रकारिता क्षेत्र से जुड़े हैं। इस तरह देखा जाए तो आठ में से सात नवनियुक्त एल्डरमैन किसी न किसी भाजपा नेता या राजनीतिक पावर सेंटर के करीबी माने जा रहे हैं, जबकि एक नाम पत्रकारिता क्षेत्र से सामने आया है।
विधायक बनाम सांसद: एल्डरमैन नियुक्तियों में 4-1 का सियासी स्कोर?
देवास भाजपा में सांसद महेंद्र सिंह सोलंकी और विधायक गायत्री राजे पवार के अलग-अलग राजनीतिक खेमों की चर्चा कोई नई बात नहीं है। स्थानीय राजनीति में दोनों नेताओं के समर्थकों के बीच खेमेबाजी समय-समय पर सामने आती रही है। ऐसे में एल्डरमैन नियुक्तियों को भी भाजपा के अंदर चल रहे शक्ति संतुलन के नजरिए से देखा जा रहा है।
मौजूदा नियुक्तियों में विधायक गायत्री राजे पवार के खेमे से जुड़े माने जा रहे चार लोगों को जगह मिली है। इसके मुकाबले सांसद महेंद्र सिंह सोलंकी के करीबी माने जाने वाले केवल संतोष वर्मा को एल्डरमैन बनाया गया है।
यदि स्थानीय राजनीतिक चर्चाओं के आधार पर विधायक और सांसद खेमे की सीधी तुलना की जाए तो एल्डरमैन नियुक्तियों में सियासी स्कोर 4 बनाम 1 दिखाई देता है। जाहिर तौर पर इस सूची में विधायक पवार के खेमे का पलड़ा भारी नजर आ रहा है।
हालांकि सांसद का राजनीतिक क्षेत्र पूरे देवास-शाजापुर लोकसभा क्षेत्र में फैला है, जबकि विधायक का सीधा राजनीतिक प्रभाव देवास विधानसभा और शहर की स्थानीय राजनीति में अधिक होता है। इसके बावजूद दोनों खेमों के बीच संख्या का यह अंतर भाजपा की अंदरूनी राजनीति में चर्चा का विषय बन सकता है।
सभापति और जिलाध्यक्ष के करीबियों को भी मिला स्थान
एल्डरमैन नियुक्तियों में केवल विधायक और सांसद खेमे का ही प्रभाव नहीं दिखता। नगर निगम की राजनीति में प्रभाव रखने वाले सभापति रवि जैन के करीबी माने जाने वाले सचिन सोनी को भी जगह मिली है। वहीं भाजपा जिला संगठन से जुड़े राजनीतिक समीकरण में जिलाध्यक्ष राय सिंह सेंधव के करीबी माने जाने वाले दिनेश सांखला को एल्डरमैन बनाया गया है।
इस लिहाज से देखें तो आठ पदों के जरिए भाजपा के अलग-अलग राजनीतिक पावर सेंटरों को साधने की कोशिश नजर आती है। हालांकि इसमें सबसे बड़ा हिस्सा विधायक खेमे के खाते में जाता दिखाई दे रहा है।
एल्डरमैन का उद्देश्य विशेषज्ञता या राजनीतिक समर्थकों का समायोजन?
नगरीय निकायों में एल्डरमैन यानी मनोनीत सदस्यों की व्यवस्था के पीछे मूल भावना ऐसे अनुभवी और विशिष्ट व्यक्तियों को नगर निकाय से जोड़ने की है, जिन्हें नगरीय प्रशासन, कानून, समाजसेवा या अन्य संबंधित क्षेत्रों का विशेष ज्ञान और अनुभव हो। ऐसे लोगों के अनुभव और सुझावों का लाभ नगर निगम को मिल सके और शहर से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञ दृष्टिकोण सामने आए, इसी उद्देश्य से मनोनीत सदस्यों की व्यवस्था की गई है।
लेकिन व्यवहार में एल्डरमैन के पद अक्सर राजनीतिक नियुक्तियों का माध्यम बनते दिखाई देते हैं। सत्ता में मौजूद राजनीतिक दलों पर यह सवाल उठता रहा है कि वे समाज के विभिन्न क्षेत्रों के विशिष्ट और अनुभवी लोगों को प्राथमिकता देने के बजाय अपने कार्यकर्ताओं, समर्थकों और नेताओं के करीबियों को इन पदों पर समायोजित करते हैं।
देवास की मौजूदा सूची को लेकर भी इसी तरह का सवाल खड़ा हो रहा है। यदि राजनीतिक नजदीकियों को लेकर चल रही चर्चाओं को आधार माना जाए तो आठ में से सात एल्डरमैन किसी न किसी भाजपा नेता या राजनीतिक पावर सेंटर के करीबी माने जा रहे हैं। केवल चेतन योगी पत्रकारिता क्षेत्र से जुड़े व्यक्ति के रूप में इस सूची में दिखाई देते हैं।
सवाल यह नहीं है कि किसी राजनीतिक दल से जुड़े व्यक्ति को एल्डरमैन क्यों बनाया गया, बल्कि सवाल यह है कि क्या इस व्यवस्था में समाज के अन्य क्षेत्रों के अनुभवी और विशेषज्ञ लोगों को भी पर्याप्त अवसर मिल रहा है? शहर में कानून, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण, नगरीय नियोजन, उद्योग, व्यापार और समाजसेवा जैसे क्षेत्रों में काम करने वाले अनुभवी लोग मौजूद हैं। ऐसे व्यक्तियों की विशेषज्ञता भी नगर निगम के कामकाज और शहर के विकास में उपयोगी साबित हो सकती है।
सात-आठ महीने का पद, फिर भी लंबा इंतजार
इन नियुक्तियों का एक और दिलचस्प पहलू इनका समय है। एल्डरमैन बनने की प्रतीक्षा लंबे समय से की जा रही थी, लेकिन नियुक्तियां ऐसे समय हुई हैं जब मौजूदा नगर निगम परिषद का कार्यकाल करीब सात-आठ महीने ही शेष बताया जा रहा है। ऐसे में जिन लोगों को लंबे इंतजार के बाद यह राजनीतिक और सार्वजनिक पद मिला है, उनके पास अपनी भूमिका निभाने के लिए अपेक्षाकृत कम समय होगा।
कुल मिलाकर देवास की एल्डरमैन नियुक्तियों ने एक साथ दो बहसों को जन्म दिया है। पहली—भाजपा की अंदरूनी राजनीति में विधायक बनाम सांसद के शक्ति संतुलन की, जहां फिलहाल विधायक खेमा 4-1 से आगे दिखाई देता है। और दूसरी—क्या एल्डरमैन जैसी व्यवस्था वास्तव में समाज के अनुभवी और विशिष्ट लोगों की विशेषज्ञता का लाभ नगर निगम को दिलाने के लिए इस्तेमाल हो रही है, या फिर यह राजनीतिक समर्थकों और करीबियों को पद देकर संतुष्ट करने का माध्यम बनती जा रही है?



